बांग्लादेश में 7 हसीना सहयोगियों को मौत की सज़ा, भारत में शरण पर अटकलें

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By नव ठाकुरिया

नई दिल्ली: दक्षिण एशिया के मुस्लिम-बहुल देश बांग्लादेश में राजनीतिक और न्यायिक उठापटक का दौर लगातार जारी है। भारत और म्यांमार की सीमा से सटे इस देश की राजधानी ढाका में आए दिन होने वाले प्रदर्शनों और अदालती फैसलों के बीच, मौत की सजा के मामलों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में, बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने दो साल पहले देश में हुए बड़े जन-आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के मामलों में कड़े फैसले सुनाए हैं।

अवामी लीग के नेताओं पर कड़ी सजा और संपत्तियां कुर्क

ताजा घटनाक्रम के तहत, अदालत ने अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर के साथ-साथ बहाउद्दीन नसीम, मोहम्मद अली अराफात, शेख फ़ज़ले शम्स पराश और मैनुल हुसैन खान निखिल को मौत की सजा सुनाई है। इसके अलावा, युवाओं के नेतृत्व वाले उस बड़े आंदोलन के दौरान बड़े पैमाने पर हत्याओं की साजिश रचने के आरोप में छात्र संगठन ‘छात्र लीग’ के दो नेताओं सद्दाम हुसैन और शेख वली आसिफ़ एनन को भी दोषी करार दिया गया है। ढाका स्थित तीन सदस्यीय आईसीटी पैनल ने दोषी ठहराए गए नेताओं की 50 प्रतिशत निजी संपत्ति (कुल लगभग 500 मिलियन टका) जब्त करने का भी आदेश दिया है, जिसका उपयोग प्रदर्शन के दौरान प्रभावित हुए पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के लिए किए जाने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि इन सभी दोषियों पर उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाया गया, क्योंकि वे सभी फिलहाल फरार हैं और माना जा रहा है कि उन्होंने चुपके से भारत में शरण ली हुई है। इस फैसले का स्वागत करते हुए पीड़ित परिवारों ने ढाका की मौजूदा सरकार से अपील की है कि वह सभी दोषियों को वापस लाकर उनकी सजा सुनिश्चित करे।

शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा और भारत-बांग्लादेश संबंध

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, जिन्हें 2024 के राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन (जिसमें संयुक्त राष्ट्र पैनल के अनुसार 1,400 से अधिक लोग मारे गए थे) के बाद 5 अगस्त 2024 को सत्ता छोड़कर भारत में अस्थायी शरण लेनी पड़ी थी, उन्हें भी नवंबर 2025 में इसी तरह की कानूनी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा था। नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार के बाद अब प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार भी 2013 की द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना को वापस लाने की मांग कर रही है।

हालांकि, भारत सरकार ने इस मामले में कानूनी और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं का हवाला देते हुए सावधानीपूर्वक रुख अपनाया है और हसीना की सुरक्षा तथा निष्पक्ष मुकदमे की शर्तों पर विचार कर रही है। इस बीच, 78 वर्षीय शेख हसीना के आगामी दिसंबर तक स्वदेश लौटने के संकल्प ने कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। ढाका सरकार ने भारत में उनके द्वारा दिए गए बयानों और मीडिया गतिविधियों पर कड़ी नाराजगी जताई है, जबकि नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि वे प्रेस क्लब के स्वतंत्र आयोजनों में थीं और भारत अपनी संप्रभुता व अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह सतर्क है।

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नव ठाकुरिया

लेखक गुवाहाटी स्थित एक पत्रकार हैं, जो विश्व भर के विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए नियमित रूप से लेखन करते हैं।