गुवाहाटी: पूर्वी असम में बाढ़ की भीषण त्रासदी के बीच जमीन और पर्यावरण अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे स्थानीय एक्टिविस्ट प्रणब डोले पर असम सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), 1980 के तहत कार्रवाई किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रणब को अदालत से जमानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद दोबारा हिरासत में ले लिया गया, जिसको लेकर मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों में भारी आक्रोश है।

प्रणब डोले को 13 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। उनके साथ जेल में बंद अन्य चार एक्टिविस्टों अमित नाग, ब्रिजित कुतुम, भास्कर सैकिया और राजीव पेगू सहित उन्हें गोलाघाट जिला अदालत से 29 जुलाई को जमानत मिल गई थी। हालांकि, अगले ही दिन राज्य सरकार ने एनएसए के कड़े प्रावधान लागू कर उन्हें पुनः हिरासत में ले लिया।
प्रणब डोले यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व के समीप प्रस्तावित एक लग्जरी टूरिज्म प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। असम पर्यटन विकास निगम को इंग्ले पाथर में लगभग 30 बीघा जमीन आवंटित किए जाने के बाद स्थानीय आदिवासी समुदायों के पारंपरिक अधिकारों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव का दावा करते हुए 29 जून को विरोध प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद यह कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन और 60 से अधिक नागरिक संगठनों ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक असहमति को कुचलने का प्रयास बताया है। सेव काजीरंगा अभियान और पर्यावरणविदों का कहना है कि प्रस्तावित होटल स्थल हाथियों का एक प्रमुख आवागमन गलियारा है और जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने वाले स्थानीय समुदाय विकास विरोधी नहीं हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश और असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी सरकार पर निवारक हिरासत कानूनों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने की निंदा की है और इस मामले की निष्पक्ष न्यायिक समीक्षा की मांग की है।