सोलन: शिक्षकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और भाषा शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाने के उद्देश्य से गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सोलन में 11 एवं 12 जुलाई 2026 को दो दिवसीय विशेष हिंदी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय कार्यशाला का मुख्य ध्येय हिंदी शिक्षण को गतिविधि-आधारित, रोचक और तकनीक-संपन्न बनाना था, ताकि विद्यार्थियों में मातृभाषा के प्रति न केवल रुचि पैदा हो, बल्कि वे पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी अभिव्यक्ति कर सकें।

समारोह का शुभारंभ भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा के अनुसार ज्ञान-ज्योति प्रज्ज्वलित कर किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सागरिका बक्षी तथा आर्मी पब्लिक स्कूल, चंडीमंदिर, चंडीगढ़ से आई रिसोर्स पर्सन्स श्रीमती जोशना देवी एवं श्रीमती मिथिलेश आर्या ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का आगाज किया। इसके उपरांत प्रधानाचार्या द्वारा दोनों विदुषी अतिथियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधे भेंट कर ग्रीन वेलकम किया गया।
दो दिनों तक चले विभिन्न सत्रों के दौरान दोनों संसाधन विशेषज्ञाओं ने हिंदी शिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल टूल्स, इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म, एक्सपीरिएंशियल लर्निंग तथा दक्षता-आधारित शिक्षण के प्रभावी प्रयोग पर शिक्षकों का विस्तृत मार्गदर्शन किया। उन्होंने क्लासरूम के लिए कई ऐसी व्यावहारिक और मजेदार गतिविधियां साझा कीं, जिन्हें अपनाकर शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक जीवंत और सहभागितापूर्ण बनाया जा सकता है।
कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल स्थानीय स्कूल ही नहीं, बल्कि जिला सोलन के विभिन्न नामी विद्यालयों से आए भाषा शिक्षकों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। ग्रुप डिस्कशन, इनोवेटिव भाषा-खेलों, डिजिटल प्रस्तुतीकरण और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागी शिक्षकों ने शिक्षण के नए गुर सीखे। दोनों रिसर्स पर्सन्स की विषय पर गहरी पकड़, संवादात्मक शैली और व्यावहारिक दृष्टिकोण ने सभी को बेहद प्रभावित किया।
इस अवसर पर शिक्षकों को प्रेरित करते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सागरिका बक्षी ने कहा कि एक शिक्षक तभी वास्तव में सफल और प्रासंगिक होता है, जब वह स्वयं जीवनभर एक शिक्षार्थी बनकर निरंतर सीखने के लिए तत्पर रहता है। बदलते डिजिटल युग के साथ नई तकनीकों, नवाचारी शिक्षण विधियों और रचनात्मक गतिविधियों को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान को हमारे शिक्षक अपनी कक्षाओं में लागू करेंगे, जिससे विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति तार्किक सोच और रचनात्मकता का विकास होगा।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार ने दोनों सम्माननीय संसाधन विशेषज्ञाओं के प्रति उनके अमूल्य मार्गदर्शन और उत्कृष्ट प्रशिक्षण के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। साथ ही, गुरुकुल विद्यालय प्रबंधन के प्रति विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया गया, जिनके दूरदर्शी नेतृत्व और शिक्षकों के प्रोफेशनल डेवलपमेंट के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण इस प्रकार की उच्च गुणवत्तापूर्ण कार्यशाला का सफल आयोजन संभव हो सका।