नाहन : विश्व प्रसिद्ध रेसलर ‘द ग्रेट खली’ के परिवार से संबंधित एक बहुचर्चित भूमि विवाद मामले में वरिष्ठ सिविल जज विकास गुप्ता की अदालत ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश सुनाया है। अदालत ने वादी पक्ष को राहत प्रदान करते हुए विवादित भूमि के भौतिक कब्जे में किसी भी प्रकार के अनधिकृत हस्तक्षेप और जबरन बेदखली पर कानूनी रोक लगा दी है।
यह कानूनी मामला तहसील पांवटा साहिब के मौजा सूरजपुर स्थित खसरा संख्या 164/130 की लगभग 18-09 बीघा जमीन से जुड़ा हुआ है। रेसलर खली के पिता ज्वाला राम तथा जसबीर कौर द्वारा अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि विपक्षी पक्ष (बिमला देवी व अन्य) द्वारा उनकी भूमि पर अवैध कब्जा करने और उन्हें जबरन वहां से बेदखल करने की नीयत से दबाव बनाया जा रहा है।

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अदालत ने 10 जून 2026 को एडवोकेट अजय कुमार को ‘लोकल कमिश्नर’ (स्थानीय आयुक्त) नियुक्त किया था। लोकल कमिश्नर ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद 22 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी। हालांकि प्राथमिक रिपोर्ट में जमीन के कुछ हिस्सों पर वादी पक्ष की उपस्थिति को लेकर बिंदु उठाए गए थे, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए कि वे लंबे समय से इस भूमि पर खेती-बाड़ी कर रहे हैं और वहां उनका पुराना ट्यूबवेल, फेंसिंग, बाउंड्री वॉल व अन्य निर्माण कार्य मौजूद हैं।
याचिकाकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि 11 और 12 सितंबर 2026 की दरमियानी रात विपक्षी दल के लोग ट्रैक्टर लेकर खेत में घुस आए और वहां लगी गन्ने व धान की पकी फसल को भारी नुकसान पहुँचाया। इसके पश्चात 14 सितंबर को भी जेसीबी की मदद से जबरन बाउंड्री वॉल खड़ी करने का प्रयास किया गया।
वरिष्ठ सिविल जज विकास गुप्ता ने मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के ‘रामे गौड़ा बनाम एम. वरदप्पा नायडू’ मामले के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को, जिसका भूमि पर शांतिपूर्ण व दीर्घकालिक कब्जा हो, उसे बिना कानूनी प्रक्रिया के बेदखल नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि यदि इस मोड़ पर आवेदकों को जबरन हटाया जाता है, तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।
कोर्ट ने विपक्षी पक्ष को निर्देश जारी किए हैं कि वे मुकदमे के लंबित रहने तक वादी पक्ष के कब्जे में किसी भी गैर-कानूनी तरीके से दखल न दें। हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में यह साफ कर दिया है कि यह केवल एक अंतरिम राहत है और इससे जमीन के अंतिम मालिकाना हक या मुख्य केस के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।