नाहन : जिला मुख्यालय नाहन के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। शहर को होने वाली पेयजल आपूर्ति में अब कैल्शियम की अधिक मात्रा (Hardness) की समस्या बीते दिनों की बात हो जाएगी। जल शक्ति विभाग ने एक आधुनिक और सुरक्षित तकनीक खोज निकाली है, जिसके जरिए पानी में मौजूद अतिरिक्त कैल्शियम को बिना किसी हानिकारक केमिकल के डिसोल्व (घोला) जा सकेगा। विभाग को इस तकनीक के इस्तेमाल के लिए हेड ऑफिस से हरी झंडी मिल गई है।
नाहन शहर को मुख्य रूप से तीन प्रमुख पेयजल योजनाओं के माध्यम से पानी की सप्लाई दी जाती है। जल शक्ति विभाग के निरीक्षण में पाया गया था कि नहर-स्वार और बोगरिया घाट योजनाओं से आने वाले पानी में कैल्शियम की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक है। अत्यधिक कैल्शियम की वजह से न केवल लोगों को पथरी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का डर रहता था, बल्कि घरों की पाइपलाइनों और गीजर आदि में भी सफेद परत (Scaling) जमने की शिकायतें आ रही थीं।

जल शक्ति विभाग, सिरमौर के अधीक्षण अभियंता (SE) इंजीनियर राजीव कुमार ने बताया कि विभाग इस समस्या का स्थाई समाधान ढूंढने में जुटा था। उन्होंने जानकारी दी कि विभाग ने एक ऐसी नई तकनीक का सफल प्रयोग किया है जिसमें बिना किसी केमिकल के इस्तेमाल के, केवल ‘टर्बोलेंस’ (पानी के तेज बहाव और घर्षण) के माध्यम से अतिरिक्त कैल्शियम को पानी में ही पूरी तरह डिसोल्व कर दिया जाता है। इससे पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा और वह स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।
विभाग के अनुसार, हेड ऑफिस से अनुमति मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया है। सबसे पहले इस तकनीक को नहर-स्वार पेयजल योजना पर लागू किया जाएगा। इसके सफल कार्यान्वयन के बाद इसे बोगरिया घाट और अन्य प्रभावित योजनाओं में भी विस्तार दिया जाएगा।
इस पहल से नाहन शहर के हजारों उपभोक्ताओं को अब साफ, स्वच्छ और नरम पानी (Soft Water) उपलब्ध होगा। जल शक्ति विभाग की इस तकनीकी सफलता को नाहन के विकास और जन-स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।