नाहन में बिना फीस 70 वर्षों से टूटी हड्डियां और मोच ठीक कर रहे 100 साल के जादूगर: दूर-दूर से आते हैं मरीज

नाहन : जब हौसला और सेवा की भावना दिल में हो, तो उम्र महज एक आंकड़ा बनकर रह जाती है। इस बात की जीती-जागती मिसाल हैं जिला सिरमौर के ऐतिहासिक शहर नाहन में रहने वाले जगत राम शर्मा। मूल रूप से बिरला क्षेत्र के रहने वाले जगत राम शर्मा की उम्र आज 100 वर्ष (एक सदी) से भी अधिक हो चुकी है, लेकिन इस उम्र में भी वे बिना किसी स्वार्थ और लालच के मानवता की ऐसी सेवा कर रहे हैं, जो आज के व्यावसायिक दौर में किसी चमत्कार से कम नहीं है। नाहन और आसपास के इलाकों में लोग उन्हें आदर से पहलवान के नाम से जानते हैं।

जगत राम शर्मा पिछले लगभग 70 वर्षों से लगातार उन मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिनकी हड्डियों में फ्रैक्चर (टूटना) हो, मोच आ गई हो या फिर हाथ-पैर और जोड़ों में पुराना दर्द हो। उनके पास रोजाना ऐसे अनगिनत मरीज पहुंचते हैं और वे अपने हुनर से उन्हें पल भर में राहत पहुंचा देते हैं।

70 वर्षों का अनुभव और गुरु का आशीर्वाद
बुजुर्ग जगत राम शर्मा बताते हैं कि वे पिछले 7 दशक (70 साल) से यह काम कर रहे हैं। उन्होंने यह प्राचीन विद्या और कला अपने गुरु से सीखी थी। गुरु से मिले इस आशीर्वाद और ज्ञान को उन्होंने कभी व्यापार नहीं बनने दिया। आज के दौर में जहां अस्पतालों का खर्च आम आदमी की कमर तोड़ देता है, वहीं जगत राम शर्मा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे इस इलाज के बदले किसी से एक रुपया भी नहीं मांगते। जो कोई मरीज ठीक होने के बाद अपनी खुशी से उन्हें श्रद्धा स्वरूप जो कुछ भी दे देता है, वे उसे ही सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं।

18 साल की पहलवानी और दूर-दूर तक नाम
अपनी इस लंबी उम्र और तंदुरुस्ती का राज साझा करते हुए जगत राम बताते हैं कि वे अपने जमाने के बेहतरीन पहलवान रहे हैं और उन्होंने 18 वर्षों तक अखाड़े में पहलवानी की है। यही कारण है कि आज 100 साल की उम्र पार करने के बाद भी वे शारीरिक रूप से सक्रिय हैं और उनके हाथों की पकड़ में वही पुरानी ताकत बरकरार है। अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि पहले वे नाहन के ‘दो सड़का’ (शिमला रोड) के पास बैठकर मरीजों को देखते थे।

NGO ने बढ़ाया मदद का हाथ
बुजुर्ग जगत राम शर्मा के इस निस्वार्थ सेवा भाव और जज्बे को देखते हुए नाहन की एक समाज सेवी संस्था (NGO) ने भी सरहानीय कदम उठाया है। नाहन हॉस्पिटल को जाने वाले रास्ते में इस NGO ने उन्हें रहने और अपना काम (मरीजों को देखने) के लिए बकायदा एक कमरा उपलब्ध करवाया है। अब वे काफी समय से इसी कमरे में बैठकर आराम से इस परोपकार के कार्य को अंजाम दे रहे हैं, जिससे मरीजों को भी उन्हें ढूंढने में आसानी होती है।

कर्नल भी गाड़ी भेजकर बुलाते हैं, दूर-दूर तक है नाम
जगत राम शर्मा के हुनर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास केवल नाहन या आसपास के ग्रामीण इलाकों से ही लोग नहीं आते, बल्कि बहुत दूर-दूर से मरीज अपनी तकलीफ लेकर पहुंचते हैं। उन्होंने गर्व से बताया कि उनके काम और हुनर के कायल बड़े-बड़े लोग हैं; यहां तक कि सेना के एक कर्नल तो उन्हें बकायदा अपनी गाड़ी भेजकर अपने पास बुलाते हैं ताकि वे उनका या उनके परिचितों का इलाज कर सकें।

शारीरिक कमजोरी और ढलती उम्र के बावजूद जगत राम शर्मा का यह जज्बा नाहन ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए एक अनूठी मिसाल है, जो हमें सिखाती है कि सच्ची मानवता क्या होती है।

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पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।