नाहन : देवभूमि हिमाचल के नाहन में आस्था और आध्यात्म का एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। नाहन की तलहटी में बसा, जवाहर नवोदय विद्यालय के समीप कोटड़ी लिंक रोड पर स्थित अति प्राचीन स्वयंभू श्री नीलकंठ महादेव मंदिर (जोगन वाली) अब एक भव्य स्वरूप धारण करने जा रहा है। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा वाराणसी के संरक्षण में चल रहे इस दिव्य स्थान पर 22 फरवरी (रविवार) को दोपहर 12:00 बजे मंदिर पुनर्निर्माण हेतु भूमि पूजन का भव्य आयोजन किया जाएगा।
मान्यता है कि इस मंदिर का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा है और पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहाँ शिव तपस्या की थी। यहाँ सदियों से एक प्राचीन धूना चेतन स्वरूप में प्रज्वलित है। माना जाता है कि यहाँ एक ‘जोगिन’ तपस्या में लीन रहती थी, जिसके नाम पर इस स्थान को ‘जोगन वाली’ कहा जाता है।

80 के दशक में यहाँ के शिवलिंग की शक्ति का अनुभव स्थानीय निवासी हरिश्चंद्र सैनी को हुआ था। वहीं, 21वीं सदी की शुरुआत में महात्मा हरिओम गिरी को ध्यान के दौरान यहाँ द्वापर युग की समाधियों का आभास हुआ, जिसकी पुष्टि बाद में खुदाई में मिले प्राचीन अवशेषों से हुई। सदियों से यह स्थान ऋषि-मुनियों की तपस्थली और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाला जाग्रत केंद्र रहा है। अब भोलेनाथ की इसी पावन धरा पर एक भव्य और दर्शनीय मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।
यह आलौकिक शिवालय कालसर्प दोष निवारण और सोमवार के व्रतों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। मंदिर के समीप ही शिव की नागकन्या मां मनसा देवी का भी प्राचीन मंदिर है, जो इस स्थान की धार्मिक महत्ता को पूर्ण करता है।
इस भव्य निर्माण कार्य का श्रीगणेश इस रविवार दोपहर 12:00 बजे शुभ मुहूर्त में भूमि पूजन के साथ किया जाएगा। बाबा हरिओम गिरी ने समस्त शिवभक्तों और नाहन वासियों को इस पावन अवसर पर उपस्थित रहने का आशीर्वाद स्वरूप निमंत्रण दिया है।
हरिओम गिरी का मानना है कि किसी प्राचीन शिवालय का जीर्णोद्धार केवल ईंट-पत्थर का निर्माण नहीं, बल्कि समाज के कल्याण का मार्ग है। जो भी श्रद्धालु इस पुनीत कार्य में अपना योगदान देना चाहते हैं, वे श्रद्धापूर्वक सेवा कर सकते हैं