सोलन: हिमाचल प्रदेश में जिला सिरमौर के श्री रेणुका जी क्षेत्र के अंतर्गत संगड़ाह के रहने वाले पंकज कुमार ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा इन दिनों खूब हो रही है। उच्च शिक्षा और बहुराष्ट्रीय कंपनी की शानदार नौकरी छोड़कर पंकज ने नौणी यूनिवर्सिटी के सहयोग से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए पीक्स एंड रूट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से अपनी फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की है।

श्री रेणुका जी-हरिपुरधार मार्ग पर स्थित कालथ गांव में स्थापित इस लघु उद्योग के माध्यम से न केवल स्थानीय फलों और सब्जियों को नया बाजार मिल रहा है, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
बोइंग की नौकरी छोड़ी
स्वर्गीय श्री एच. सी. भारद्वाज के पुत्र पंकज कुमार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद शानदार रही है। उन्होंने प्रतिष्ठित संस्थान एनआईटी (NIT) हमीरपुर से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक और एम.टेक की डिग्री हासिल की है। उच्च शिक्षा के बाद उनका चयन वैश्विक विमानन कंपनी बोइंग (Boeing) में हुआ था। सब कुछ बेहतरीन चल रहा था, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान पिता के आकस्मिक देहांत के कारण उन्हें अपने घर वापस लौटना पड़ा।
घर लौटने के बाद पंकज ने हार मानने के बजाय हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों की एक बड़ी समस्या को समझा, यहाँ के फल और सब्जियां सही समय पर बाजार न पहुँचने के कारण अक्सर बर्बाद हो जाते थे। इसी बर्बादी को रोकने और वोकल फॉर लोकल को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से उन्होंने इस फूड प्रोसेसिंग यूनिट की नींव रखी।

पारंपरिक स्वाद
पंकज कुमार के इस स्टार्टअप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के कृत्रिम रंग या स्वाद का उपयोग नहीं किया जाता। उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक और एफ.एस.एसए.आई. (FSSAI) के कड़े मानकों के अनुसार तैयार किए जाते हैं। गांव के बागों से स्थानीय स्तर पर उगाए गए आम, अदरक, मिर्च, खुबानी, नींबू, टमाटर और दुर्लभ हिमालयी जड़ी-बूटियाँ चुनी जाती हैं। कच्चे उत्पादों को साफ करके पारंपरिक स्टेनलेस स्टील के बर्तनों में स्वच्छ परिस्थितियों में धूप में सुखाया जाता है। मूल सुगंध और पोषण बनाए रखने के लिए इन्हें सरसों के तेल में धीमी आंच पर पकाया जाता है।
उत्पादों की श्रृंखला में मसालेदार आम, हिमालयी अदरक, हरी मिर्च, लहसुन, नींबू मिर्च और मिक्स्ड वेज अचार शामिल हैं । चटनी में मीठी व तीखी खुबानी, पुदीना-धनिया, लाल मिर्च-लहसुन, अमरूद, टमाटर और खास पहाड़ी शैली का लाल मिर्च पेस्ट शामिल हैं। जबकि जैम और केचप में ब्लूबेरी, मिक्स्ड फ्रूट, कीवी, नाशपाती व सेब का जैम, केला व अमरूद का अनोखा केचप और पारंपरिक आम चुख शामिल हैं ।
स्थानीय बाजारों से यूरोप तक का सफर
पंकज कुमार द्वारा तैयार किए जा रहे यह पहाड़ी उत्पाद सिर्फ हिमाचल या भारत के महानगरों तक ही सीमित नहीं हैं। स्थानीय बाजारों में के बाद अब ये उत्पाद यूरोपीय देश चेक रिपब्लिक तक निर्यात किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहाड़ी स्वाद को मिल रही यह पहचान सिरमौर और पूरे हिमाचल के लिए गर्व का विषय है।
नौणी यूनिवर्सिटी का मिला तकनीकी सहयोग
पंकज कुमार ने अपनी इस सफलता का श्रेय डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी को दिया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, विशेष रूप से डॉ. अनिल कुमार वर्मा (सहायक प्रोफेसर) के मार्गदर्शन से ही यह उद्यम संभव हो पाया है।
डॉ. वर्मा के सहयोग से ही उत्पादों का वैज्ञानिक प्रयोगशाला मूल्यांकन और गुणवत्ता आकलनमुकम्मल हो सका। पंकज समय-समय पर नौणी यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे हैं, जिसने उन्हें एक सफल एग्रो-इंटरप्रेन्योर बनने में मदद की।