नौणी विश्वविद्यालय में नेपाल के 49 अधिकारी ले रहे सेब और अखरोट की खेती का प्रशिक्षण

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By Hills Post

सोलन: नेपाल के सात प्रांतों के 49 अधिकारी डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सेब एवं अखरोट की वैज्ञानिक खेती और प्रबंधन के आधुनिक गुर सीख रहे हैं। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नेपाल के बागवानी अधिकारियों की तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करना तथा समशीतोष्ण फलों की खेती के क्षेत्र में उन्नत वैज्ञानिक ज्ञान व अनुभवों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान करना है।

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. धर्म पाल शर्मा ने किया। उन्होंने सभी प्रतिभागी अधिकारियों का स्वागत करते हुए वैज्ञानिक बागवानी ज्ञान एवं नवीनतम कृषि तकनीकों को साझा करने के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. शर्मा ने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले ये अधिकारी नेपाल लौटकर अपने-अपने प्रांतों में संसाधन व्यक्तियों (रिसोर्स पर्सन) के रूप में कार्य करेंगे और नौणी विश्वविद्यालय में सीखी गई आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रसार वहाँ के किसानों व अन्य हितधारकों तक सुनिश्चित करेंगे।

प्रशिक्षण सत्रों के दौरान नेपाल के अधिकारियों को सेब एवं अखरोट उत्पादन से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की व्यापक सैद्धांतिक व व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है। डॉ. अजय शर्मा और डॉ. मीना कुमारी के समन्वय में संचालित इस कार्यक्रम में समशीतोष्ण फल फसलों की भविष्य की संभावनाओं, पौधशाला (नर्सरी) उत्पादन तकनीकों, सिंचाई एवं जल प्रबंधन, सघन बागवानी प्रणालियों और उन्नत मूलवृंतों (रूटस्टॉक्स) के चयन पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही आधुनिक प्रवर्धन विधियों, परागण, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट व रोग नियंत्रण, कटाई उपरांत प्रबंधन तथा फल प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषयों से भी अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है।

कक्षा के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के सघन सेब, कीवी और अखरोट बागानों, पौधशालाओं तथा मधुमक्खी व फल प्रसंस्करण इकाइयों का भ्रमण भी करवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागी मृदा एवं पत्ती विश्लेषण प्रयोगशाला तथा कीटनाशक अवशेष प्रयोगशाला की अत्याधुनिक कार्यप्रणाली को भी करीब से समझ रहे हैं। कार्यक्रम के आगामी चरण में मशोबरा और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) कंडाघाट का भ्रमण भी प्रस्तावित है, जहाँ अधिकारी खेत स्तर पर अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों का जमीनी आकलन कर सकेंगे और स्थानीय विशेषज्ञों व किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर सकेंगे।

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