नाहन : साधन कम हों और इरादे बुलंद, तो उम्र हुनर के आड़े नहीं आती। सिरमौर जिले के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल त्रिलोकपुर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाला 14 वर्षीय छात्र हनी सिंह (पुत्र स्वर्गीय कृष्ण कुमार) आज अपनी असाधारण हस्तकला और मिट्टी की मूर्तिकारी से सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले हनी की जीवन यात्रा बेहद संघर्षपूर्ण रही है। जब वह महज 1 साल के थे, तब उनके पिता कृष्ण कुमार का साया उनके सिर से उठ गया था। हनी का पालन-पोषण उनकी मां कर रही हैं, जो स्थानीय माता बालासुंदरी मंदिर धर्मशाला में सफाई कार्य करके किसी तरह परिवार का जीवन यापन चलाती हैं।

10 साल की उम्र से शुरू हुआ मूर्तिकारी का सफर
हनी सिंह बताते हैं कि घर में धार्मिक माहौल और भगवान गणेश जी की नियमित पूजा-अर्चना करते-करते उनके मन में मूर्तियां बनाने की प्रेरणा जागी। महज 10 वर्ष की आयु से ही उन्होंने कच्ची मिट्टी और क्ले (Clay) से आकृतियां ढालना शुरू कर दिया था। भगवान श्री गणेश की कृपा से बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के वे आज बेहद सुंदर और सुडौल मूर्तियां बना लेते हैं।
गणेश, शिव और विष्णु भगवान की मूर्तियां बनाते हैं हनी
हनी क्ले और स्थानीय मिट्टी का उपयोग करके भगवान गणेश, भगवान विष्णु और भगवान शिव की सुंदर मूर्तियों के साथ-साथ शिवलिंग का भी निर्माण करते हैं। वे अपने स्कूल में बनी इन मूर्तियों को अक्सर अपनी शिक्षिकाओं और शिक्षकों को उपहार स्वरूप भेंट कर देते हैं। उनके इस हुनर और रचनात्मकता (Creativity) को देखकर स्कूल के शिक्षक भी दंग हैं।
शिक्षकों का मिल रहा प्रोत्साहन हनी की इस बाल कला और लगन को देखते हुए उनके स्कूल के शिक्षक भी उन्हें पूरा प्रोत्साहन देते हैं। मूर्तियों और शिवलिंग के लिए लगने वाले सामान व सामग्री का खर्च शिक्षक स्वयं अपनी जेब से देकर हनी का हौसला बढ़ाते हैं। बनाई गई कुछ मूर्तियों को हनी अपने घर में सजाकर भी रखते हैं। एक तरफ जहां पारिवारिक आर्थिक तंगी और कम उम्र में पिता को खोने का दर्द है, वहीं दूसरी ओर हनी सिंह की यह अद्भुत कला और अटूट भक्ति यह साबित करती है कि यदि प्रतिभा और ईश्वर की कृपा हो, तो विषम परिस्थितियां भी हुनर को दबने नहीं देतीं।