नाहन: हिमाचल प्रदेश में पूर्व सैनिकों के लिए ग्रुप-सी (Group-C) पदों में निर्धारित 15 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी और पारदर्शी रूप से लागू करने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। हिमाचल एक्स-सर्विसमैन संघर्ष मोर्चा और एक्स-सर्विसमैन एसोसिएशन राजगढ़ से जुड़े पदाधिकारियों ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। पूर्व सैनिकों ने आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और हाल ही में रद्द किए गए भर्ती पैनलों को तुरंत बहाल करने की पुरजोर मांग उठाई है।

एक्स-सर्विसमैन एसोसिएशन राजगढ़ के सदस्य सार्जेंट विनोद पुंडीर और संघर्ष मोर्चा के उपाध्यक्ष सूबेदार (सेवानिवृत्त) बृजमोहन ने बताया कि हाल ही में सीबीएसई स्कूलों में पूर्व सैनिकों से संबंधित भर्ती प्रक्रिया के पैनल रद्द किए जाने से प्रदेश के लगभग 500 से 800 पूर्व सैनिक सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सेना के अधिकांश जवान 15 से 20 वर्ष की कठिन सेवा पूरी करने के बाद 35 से 40 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। इस उम्र में उनके सामने परिवार के पालन-पोषण के साथ-साथ दूसरा रोजगार तलाशने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। पूर्व सैनिकों का आरोप है कि कई सरकारी विभागों में आरक्षित पदों को नियमित रूप से भरने के बजाय आउटसोर्स या अनुबंध आधारित नियुक्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।
हिमाचल एक्स-सर्विसमैन संघर्ष मोर्चा के प्रधान सूबेदार (सेवानिवृत्त) सुरेश ने कहा कि देश की रक्षा करने वाले जवानों का पुनर्वास सरकार की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने पूर्व सैनिकों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे उनकी न्यायसंगत मांगों को राज्य सरकार और मंत्रिमंडल के समक्ष मजबूती से रखेंगे। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया या आरक्षण व्यवस्था में कोई खामी या विसंगति पाई जाती है, तो उसे दूर कर पूर्व सैनिकों के हित में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके कानूनी अधिकारों के तहत 15 प्रतिशत आरक्षण को पूरी तरह लागू नहीं किया गया और रद्द किए गए भर्ती पैनलों की समीक्षा कर उन्हें राहत नहीं दी गई, तो संगठन प्रदेशभर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और लोकतांत्रिक माध्यमों से उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगा।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने पूर्व सैनिकों को आश्वस्त किया है कि मामला जल्द ही सरकार के समक्ष रखा जाएगा, जबकि पूर्व सैनिकों ने जल्द सकारात्मक फैसला न होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है।