महामहोपाध्याय प्रो. केशवराम शर्मा के जीवन पर आधारित अभिनन्दन ग्रन्थ का हुआ प्रकाशन

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By Hills Post

शिमला: हिमाचल प्रदेश की पावन धरा और संस्कृत साहित्य की विद्वत् परम्परा के लिए यह हर्ष और गौरव का क्षण है। राष्ट्रपति पुरस्कृत, ‘अभिनव कालिदास’ और ‘महामहोपाध्याय’ जैसी उपाधियों से अलंकृत प्रो. केशवराम शर्मा जी के साहित्यिक, शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक योगदान को समर्पित अभिनन्दन ग्रन्थ “केशवकीर्तिकौस्तुभ” का प्रकाशन दिल्ली के विख्यात चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन द्वारा किया गया है।

हिमाचल संस्कृत मनीषी मण्डल और अभिनन्दन ग्रन्थ समिति के सहयोग से प्रकाशित यह ग्रन्थ संस्कृत जगत् में एक ऐतिहासिक दस्तावेज माना जा रहा है। ग्रन्थ का नाम ‘केशवकीर्तिकौस्तुभ’ इसकी सार्थकता को सिद्ध करता है। जिस प्रकार भगवान विष्णु के हृदय पर ‘कौस्तुभ’ मणि सुशोभित होती है, उसी प्रकार यह ग्रन्थ प्रो. केशवराम शर्मा की कीर्ति रूपी मणि को संस्कृत जगत् के हृदय पर प्रतिष्ठित करता है।

पाँच अध्यायों का संकलन: यह विशाल ग्रन्थ पाँच अध्यायों में विभक्त है, जिसमें प्रो. शर्मा के व्यक्तित्व, उनकी कालजयी रचनाओं (जैसे- हिमाचल वैभवम्, शतक-चतुष्टयम्), उनके आदर्श जीवन और संस्मरणों का विस्तृत विवरण है। ग्रन्थ में जगद्‌गुरु शंकराचार्य अवधेशानन्द गिरि, जगद्‌गुरु रामभद्राचार्य, स्वामी परमानन्द और देश के विभिन्न संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों सहित अनेक मनीषियों के लेख और मंगल वचन संकलित हैं।

इस ग्रन्थ के सम्पादन में हिमाचल के युवा विद्वानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ग्रन्थ का सम्पादन मुख्य सम्पादक आचार्य सुरेश शर्मा भारद्वाज सहायक आचार्य, तारिणी राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, सोलन ने किया है। सह-सम्पादक डॉ. भानु शर्मा सहायक आचार्य, व्याकरण विभाग, सोलन, तथा प्रबन्ध सम्पादक महामहोपाध्याय प्रो. देवेंद्र मिश्र वेद विभागाध्यक्ष, श्रीलाल बहादुर शास्त्री केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली हैं ।

15 नवम्बर 1940 को शिमला के ठियोग (जराशी ग्राम) में जन्मे प्रो. केशवराम शर्मा का जीवन संस्कृत की साधना के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त की। सोलन और कुल्लू के महाविद्यालयों सहित SCERT में उन्होंने 33 वर्ष से अधिक समय तक हजारों शिष्यों का मार्गदर्शन किया। उन्हें राष्ट्रपति सम्मान, महाकवि श्रीहर्ष सम्मान और हिमाचल गौरव जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

काशी विद्वत् परिषद् के अध्यक्ष और देश के प्रमुख कुलपतियों ने इस ग्रन्थ के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उनका मानना है कि यह ग्रन्थ केवल एक सम्मान मात्र नहीं है, बल्कि शोधार्थियों और संस्कृत प्रेमियों के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज है।

सूत्रों के अनुसार, “केशवकीर्तिकौस्तुभ” का भव्य विमोचन समारोह शीघ्र ही आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के शीर्षस्थ विद्वान्, राजनेता और आध्यात्मिक गुरु सम्मिलित होंगे।

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