नई दिल्ली: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से एक महत्वपूर्ण भेंट की। इस दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित पहलों को और अधिक सुदृढ़ करने से जुड़े विभिन्न अहम प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में मुख्य रूप से राज्य के दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों तक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लाभ पहुंचाने पर विशेष विचार-विमर्श किया गया।

लाहौल-स्पीति और पांगी में खगोल विज्ञान केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना से अवगत करवाया, जिसके तहत लाहौल-स्पीति और पांगी जैसे उच्च ऊंचाई वाले जनजातीय क्षेत्रों में लद्दाख के हानले में संचालित सफल खगोलीय पहलों की तर्ज पर एक आधुनिक ‘खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी केंद्र’ स्थापित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि इन दुर्गम क्षेत्रों की भौगोलिक स्थितियां खगोलीय अनुसंधान और अवलोकन के लिए बेहद अनुकूल हैं, जिनका भरपूर उपयोग किया जा सकता है। इस प्रस्तावित केंद्र के बनने से स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान में अपनी रुचि विकसित करने के बेहतरीन अवसर मिलेंगे, साथ ही राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में सतत एवं ज्ञान-आधारित पर्यटन के नए द्वार भी खुलेंगे।
लैवेंडर की खेती और आकांक्षी विकासखंडों में विज्ञान संग्रहालय
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश में लैवेंडर की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का मुद्दा भी उठाया और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के माध्यम से राज्य में लैवेंडर की ‘डेमोंस्ट्रेशन साइट्स’ (प्रदर्शन स्थलों) का दायरा बढ़ाने के लिए केंद्र से सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अधिक संख्या में ऐसी प्रदर्शन साइट्स बनने से किसानों को लैवेंडर की आधुनिक खेती की तकनीकों को समझने, फसल के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे एक अत्यधिक लाभकारी वैकल्पिक फसल के रूप में अपनाने में बड़ी मदद मिलेगी।
इसके साथ ही, विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अधिक अवसर देने के उद्देश्य से, मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के आकांक्षी विकासखंडों के स्कूलों में ‘विज्ञान संग्रहालय’ (Science Museums) स्थापित करने के लिए भी केंद्रीय सहायता का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे संग्रहालय बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा जगाने के साथ-साथ उन्हें अनुभवात्मक शिक्षा के अवसर देंगे।
मौसम निगरानी नेटवर्क को मजबूत करना
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय स्तर पर मौसम निगरानी नेटवर्क को अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने आग्रह किया कि राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्वचालित वर्षामापी यंत्र (ऑटोमैटिक रेन गेज) तथा प्रत्येक विकासखंड स्तर पर स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित करने की पहल में तेजी लाई जाए। इससे पंचायत और ब्लॉक स्तर पर वर्षा व अन्य मौसम संबंधी पैमानों का एकदम सटीक और रीयल-टाइम डेटा मिल सकेगा। इस व्यवस्था से कृषि और बागवानी से जुड़े किसानों को स्थान-विशिष्ट मौसम की जानकारी मिलने से बेहतर कृषि योजना बनाने और सटीक निर्णय लेने में काफी आसानी होगी।
केंद्रीय मंत्री का सकारात्मक आश्वासन:
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए सभी महत्वपूर्ण मुद्दों और प्रस्तावों पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का पूरा आश्वासन दिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्रालय की ओर से हिमाचल प्रदेश को हरसंभव सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान करने का भी भरोसा दिलाया।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी:
इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, प्रधान आवासीय आयुक्त अजय कुमार तथा संबंधित केंद्रीय मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।