नाहन : राजगढ़ क्षेत्र के छोगटाली, कड़ा और शमोगा समेत कई गांवों में बुधवार दोपहर अचानक भीषण ओलावृष्टि हुई, जिससे किसानों और बागवानों की फसलें बर्बाद हो गईं। स्थानीय लोगों ने इस घटना को “प्रलयकारी” बताया। यह ओलावृष्टि उन किसानों के लिए दुश्वारियां बढ़ाने वाली साबित हुई, जो पहले से ही बारिश या हिमपात की बाट जोह रहे थे।
पिछले कुछ दिनों से राजगढ़ और आसपास के इलाकों में मौसम बदलता रहा था—कभी धूप तो कभी बादल छाए रहते। बुधवार सुबह मौसम साफ था, लेकिन दोपहर तक हल्के बादल दिखने लगे। किसानों को उम्मीद थी कि शायद बारिश या बर्फबारी होगी, लेकिन प्रकृति ने करवट ले ली। दोपहर बाद राजगढ़ से लगभग 20 किलोमीटर के दायरे में आए तूफान ने इन गांवों को ओलों की मार झेलनी पड़ी। करीब एक घंटे तक जारी इस प्रहार के बाद पूरा इलाका ओलों की सफेद चादर से ढक गया।

इस ओलावृष्टि का असर सिर्फ कुछ चुनिंदा गांवों तक सीमित रहा, जबकि आसपास के इलाकों में बारिश तक नहीं हुई। इस स्थानीयकृत घटना ने लोगों और विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है, क्योंकि इस मौसम में यहां ओलावृष्टि आम नहीं है। छोगटाली के एक किसान ने कहा, “हम बारिश की प्रार्थना कर रहे थे, लेकिन यह तबाही कल्पना से परे है।”
इस समय क्षेत्र में मटर, लहसुन और फूलों की फसलें लहलहा रही थीं, जिन्हें ओलावृष्टि से भारी नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, खड़ी फसलों को व्यापक क्षति हुई है, हालांकि पूरा नुकसान तभी सामने आएगा जब ओले पिघलेंगे और अधिकारी आकलन करेंगे। शमोगा के एक बागवान ने बताया, “मटर के खेत समतल हो गए हैं, और बाजार के लिए तैयार फूल नष्ट हो गए हैं। यह एक त्रासदी है।”
मौसम के इस अचानक बदलाव ने जलवायु अस्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि किसी जानहानि की खबर नहीं है, लेकिन पहले से सर्दियों की बारिश के इंतजार में जूझ रहे किसानों को आर्थिक झटका लग सकता है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सहायता का आश्वासन दिया है और मुआवजे के लिए नुकसान आकलन की योजना बनाई है।
इस घटना के बाद मौसम के बढ़ते अप्रत्याशित स्वरूप और कृषि-आधारित समुदायों पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, ओलों की सफेद चादर प्रकृति के प्रकोप और मनुष्य की सीमाओं की याद दिला रही है।