बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में शिरकत करते हुए डिग्री प्राप्त करने वाले सभी स्नातक विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल व सफल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का प्रदेश आगमन पर स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश न केवल देवभूमि है, बल्कि वीरभूमि भी है, जिसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराएं और सदियों पुराने मंदिर इसे एक विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

बिलासपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और बलिदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और देश के विकास की खातिर बिलासपुर के निवासियों ने विस्थापन का गहरा दर्द सहा है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की विकासवादी सोच के अनुरूप निर्मित भाखड़ा बांध न केवल देश की आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह बिलासपुर की जनता के अमूल्य त्याग और योगदान को भी दर्शाता है।
राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर बल देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेशवासियों को राज्य की सीमाओं के भीतर ही आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी कड़ी में एम्स दिल्ली की तर्ज पर प्रदेश में 3-टेस्ला एमआरआई, पैट स्कैन, उच्च क्षमता वाली एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी अत्याधुनिक डायग्नॉस्टिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इन विश्वस्तरीय सुविधाओं को केवल शहरों तक सीमित न रखकर दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों के नागरिकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की गई है, जिससे पूर्व में महंगे निजी अस्पतालों में उपलब्ध उपचार अब आम जनता और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सरकारी अस्पतालों में सुलभ हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में वर्तमान में उपलब्ध 277 पीजी मेडिकल सीटों में 320 अतिरिक्त सीटें बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, जिसके लिए उन्होंने मंच पर मौजूद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से विशेष सहयोग का आग्रह किया।
इसके अलावा, उन्होंने बताया कि प्रदेश में उत्तर भारत का पहला ऐसा कॉलेज शुरू किया गया है जहां पैरामेडिकल और अलाइड पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार किया जा सके। साथ ही, एम्स की तर्ज पर एक समर्पित आयुर्वेदिक अस्पताल स्थापित करने की दिशा में भी कार्य चल रहा है। इस भव्य दीक्षांत समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, सांसद हर्ष महाजन, विधायक रणधीर शर्मा, जीत राम कटवाल व त्रिलोक जम्वाल, एम्स के अध्यक्ष एन.के. अरोड़ा, कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल दलजीत सिंह तथा स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।