सोलन: शूलिनी विश्वविद्यालय के मीडिया एवं संचार संकाय और चित्रकूट कला संकाय के संयुक्त तत्वावधान में प्रसिद्ध तिब्बती लेखक और कार्यकर्ता तेनज़िन त्सुंड्यू के साथ रचनात्मक लेखन और स्वतंत्रता विषय पर एक विशेष संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में लेखन के दर्शन, इसकी जटिल प्रक्रियाओं और समाज में इसके व्यापक उद्देश्य पर गहन चर्चा की गई।

तेनज़िन त्सुंड्यू ने अपने संबोधन में लेखन को एक गहरी आंतरिक प्रक्रिया बताया। उन्होंने छात्रों को समझाते हुए कहा कि लेखन केवल शब्दों को पिरोना नहीं है, बल्कि यह अवलोकन से शुरू होकर बोध और फिर परिप्रेक्ष्य में विकसित होने वाली एक यात्रा है, जो अंततः अभिव्यक्ति का रूप लेती है।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि एक लेखक के लिए अपनी ‘ओरिजिनल आवाज़’ खोजना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों को अपनी पहचान और स्वयं के उस हिस्से पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जिससे वे लिखने का चुनाव करते हैं।
सत्र को रोचक बनाने के लिए तेनज़िन ने कई व्यावहारिक गतिविधियाँ करवाईं। उन्होंने छात्रों से यादृच्छिक संज्ञाएँ लेने और उन्हें वर्णनात्मक वाक्यांशों में बदलने को कहा। इस गतिविधि के माध्यम से उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि भाषा में अनंत संभावनाएँ छिपी हैं और एक ही शब्द को कई नजरियों से पेश किया जा सकता है।
प्रश्न-उत्तर सत्र के दौरान तेनज़िन ने अपनी व्यक्तिगत लेखन यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे स्कूल के दिनों में ‘टिंकल कॉमिक्स’ जैसे साहित्य से उनका परिचय हुआ और कैसे लेखन उनके लिए स्वयं को समझने का एक माध्यम बना। उन्होंने चिंता, उद्देश्य और स्वतंत्रता जैसे गंभीर विषयों पर बात करते हुए कहा कि लेखन आत्म-चिंतन का एक शक्तिशाली हथियार है जो संस्कृतियों और पहचानों को आपस में जोड़ता है।
इस प्रेरणादायक सत्र का समापन एक सकारात्मक प्रस्ताव के साथ हुआ। विश्वविद्यालय में अब एक कविता क्लब ) स्थापित किया जाएगा। इस कार्यक्रम ने न केवल छात्रों को लेखन की बारीकियां सिखाई, बल्कि उन्हें शब्दों की स्थायी शक्ति और सामाजिक बदलाव में उनकी भूमिका के प्रति भी जागरूक किया।