नाहन : उत्तर भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री रेणुकाजी के प्राचीन आदि उदासीन बड़ा अखाड़ा निर्वाण आश्रम में मंगलवार को एक भव्य धार्मिक समागम का आयोजन किया गया। यह आयोजन महान तपोनिष्ठ ब्रह्मलीन सुन्दरमुनि निर्वाण जी की 32वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में किया गया, जिसमें देश-प्रदेश के प्रख्यात संतों, अनुयायियों और श्रद्धालुओं ने शिरकत कर ब्रह्मलीन संत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
निर्वाण आश्रम के महंत रणेंद्र मुनि महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत 3 मार्च को हुई थी। मंगलवार को कथा व्यास मोहन चंद्र त्रिपाठी के मुखारविंद से चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। आठ दिनों तक चली इस कथा में श्रद्धालुओं ने भक्ति की गंगा में डुबकी लगाई और जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों को समझा।

समागम में पहुंचे संत समाज ने संयुक्त रूप से समाज को संदेश देते हुए कहा कि तीर्थ और गुरु की सेवा व सुमिरन ही मानव जीवन का असली आधार है। संतों ने कहा कि यही वह मूलमंत्र है जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उसे शिखर तक पहुँचा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं और शिष्यों से आह्वान किया कि वे अपनी क्षमता के अनुसार तीर्थ स्थलों और गुरु महाराज की सेवा व उत्थान में अपना योगदान अवश्य दें।
इस अवसर पर संतों ने ब्रह्मलीन सुन्दरमुनि निर्वाण जी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने लगभग 80 वर्षों तक अपने तप और भक्ति के बल से इस स्थल को अध्यात्म और सेवा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया। आज यह आश्रम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि श्री रेणुकाजी क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन का भी एक मुख्य स्रोत बनकर उभरा है।
पुण्यतिथि के इस अवसर पर निर्वाण आश्रम में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जो पूरे दिन अनवरत चलता रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इससे पूर्व महंत रणेंद्र मुनि महाराज ने आश्रम पहुँचने पर देशभर से आए प्रमुख संतों—महंत सेवादास, अमर दास, सुयज्ञमुनि, महामंडलेश्वर जगदीश दास महाराज, कमलदास महाराज, संत शांतिलाल, जयेन्द्र मुनि, सुशान्त मुनि, हनुमानदास, बलवंत दास, दामोदर दास और गोविंद मुनि महाराज का पारंपरिक रूप से स्वागत किया।