नाहन : सिरमौर निजी बस ऑपरेटर यूनियन ने शिलाई-शिमला रूट पर हुए हालिया विवाद को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। यूनियन के अध्यक्ष बलविंदर सिंह ने आज पावंटा साहिब में प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि HRTC प्रबंधन और स्थानीय स्टाफ मिलकर सरकार व मंत्रियों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पूर्व प्रधान मामराज शर्मा पर झूठी FIR दर्ज की गई है, वह पूरी तरह से गलत है। यूनियन ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि 24 घंटे के भीतर यह FIR रद्द नहीं हुई, तो जिले भर के निजी बस ऑपरेटर चक्का जाम कर हड़ताल पर चले जाएंगे।
विवाद की मुख्य जड़ समय सारणी (Time Table) को लेकर है। यूनियन का दावा है कि सरकार ने जब शिमला से शिलाई के लिए बस सेवा शुरू की, तो उसका समय दोपहर 2:46 PM रखा गया, जबकि इसी रूट पर पहले से ही 2:45 PM और 2:47 PM पर निजी बसें संचालित हो रही हैं। महज एक-एक मिनट के इस अंतराल के कारण सड़कों पर ‘अनहेल्दी कंपटीशन’ बढ़ रहा है, जो किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

यूनियन ने खुलासा किया कि इस समस्या को सुलझाने के लिए 8 अप्रैल को RTO की अध्यक्षता में एक संयुक्त बैठक हुई थी। इस बैठक में HRTC के अड्डा प्रभारी राजेंद्र सिंह, प्रेम ठाकुर और सुभारा जी के साथ निजी ऑपरेटर भी शामिल हुए थे। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि HRTC की इस नई बस को 3:17 PM पर चलाया जाएगा। यूनियन का आरोप है कि 11 अप्रैल तक तो बस इसी समय पर चली, लेकिन 12 अप्रैल को HRTC प्रबंधन ने बिना किसी सूचना के दोबारा बस को 2:46 PM पर भेज दिया, जिससे विवाद की स्थिति पैदा हुई।
पूर्व प्रधान मामराज शर्मा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने पहले पुलिस को शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, HRTC की शिकायत पर तुरंत उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सड़कें सुधर चुकी हैं, तो पुराने टाइम टेबल को अपडेट क्यों नहीं किया जा रहा? उन्होंने आरोप लगाया कि HRTC बसें 20 मिनट बाद चलने के बावजूद तेज रफ्तार के कारण निजी बसों से पहले पहुँच रही हैं, जो यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
यूनियन ने स्पष्ट किया कि उन्हें नई बस सेवा शुरू होने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे उचित समय अंतराल (कम से कम 15-20 मिनट) के साथ चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी बस मालिक टैक्स भरते हैं और जनता की सेवा कर रहे हैं, लेकिन उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। यदि 20 अप्रैल तक उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ और FIR रद्द नहीं की गई, तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस की होगी।