सोलन: पब्लिक पॉलिसी इंडिया और एलआर ग्रुप ऑफ इंस्टीटूट्स द्वारा भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा माई भारत के सहयोग से आज सोलन, हिमाचल प्रदेश में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 यंग प्रोफेशनल्स राउंडटेबल का भव्य आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प से प्रेरित होकर आयोजित यह राउंडटेबल विकसित भारत के लिए भविष्य-सक्षम कार्यबल का निर्माण विषय पर पूरी तरह केंद्रित रहा।

चर्चा के प्रमुख बिंदु और वक्ताओं के विचार
कार्यक्रम की शुरुआत VBYLD 2026 के प्रस्तोता हिराज सूद के युवा प्रस्तुतीकरण से हुई, जिन्होंने भारत के विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश को वास्तविक उत्पादकता लाभांश में बदलने के लिए सामुदायिक कौशल प्रयोगशालाओं, ग्राम कौशल बैंक और फ्यूचर स्किल पार्कों के गठन का अनूठा सुझाव दिया।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. (प्रो.) कुलभूषण चंदेल ने शिक्षा प्रणाली को उद्योग जगत की आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालने तथा केवल किताबी ज्ञान के स्थान पर क्षमता, नवाचार और मानवीय मूल्यों के निर्माण पर विशेष बल दिया। कोंटेंट फैक्ट्री की संस्थापक एवं सीईओ श्रीमती रहतका सिंह ने युवाओं से मजबूत चरित्र, चुनौतियों से पार पाने की क्षमता और एक विश्वसनीय व्यक्तिगत छवि गढ़ने का आग्रह किया।
पब्लिक पॉलिसी इंडिया एवं STRIDE के संस्थापक यश अग्रवाल ने युवाओं को देश में ही रहकर करियर बनाने, इंटर्नशिप के जरिए व्यावहारिक अनुभव अर्जित करने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से अप्रभावित रहने वाले मौलिक मानवीय कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया। L.L.R. Educational Trust’ की प्रबंध निदेशक डॉ. एच.सी. शचि सिंह ने स्कूलों, आईटीआई और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में मानवीय और नैतिक मूल्यों को अनिवार्य रूप से शामिल करने की वकालत की।
इस अवसर पर माई भारत सोलन के जिला युवा अधिकारी भूपेंद्र सिंह गिल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. निशा शर्मा, डॉ. कंचन बाला जायसवाल, डॉ. श्वेता संधू, डॉ. अवनीत गुप्ता तथा रजिस्ट्रार सूरत सिंह भी उपस्थित रहे।
संवादात्मक सत्र और निष्कर्ष
कार्यक्रम के दौरान आयोजित संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने भविष्य के आवश्यक कौशल, ग्रामीण स्तर पर कौशल विकास और शिक्षा व रोजगार के बीच की खाई को पाटने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर चर्चा की। इस पूरी चर्चा में सभी ने एकमत होकर यह निष्कर्ष निकाला कि केवल पेशेवर कौशल होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विवेक, सहानुभूति, ईमानदारी और आजीवन सीखने की भावना होना भी अत्यंत अनिवार्य है।