सोलन: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अभेद्य किला और मजबूत गढ़ मानी जाने वाली सलोगड़ा बस्ती के 100 से अधिक सक्रिय कार्यकर्ताओं ने भाजपा को अलविदा कहकर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। स्थानीय नेता प्रताप के नेतृत्व में हुए इस सामूहिक दल-बदल को जिला सोलन की राजनीति में एक बड़े नीतिगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों के दृष्टिकोण से इसे बेहद अहम माना जा रहा है।

इस विशेष राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल के बेटे और युवा कांग्रेस नेता कर्नल संजय शांडिल मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने प्रताप और उनके साथ आए सभी 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को पार्टी का पटका पहनाकर कांग्रेस परिवार में विधिवत स्वागत किया। इस मौके पर कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई वाली प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, व्यवस्था परिवर्तन के फैसलों और निरंतर हो रहे विकास कार्यों से प्रभावित होकर लोग लगातार मुख्यधारा में कांग्रेस के साथ जुड़ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सलोगड़ा बस्ती लंबे समय से पारंपरिक रूप से भाजपा के सबसे मजबूत जनाधार वाले कोर-इलाकों में शामिल रही है। ऐसे में चुनाव के ठीक बाद इतनी बड़ी संख्या में कैडर का एक साथ टूटकर कांग्रेस में जाना भाजपा संगठन के लिए एक बड़ा झटका है।
शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मजबूत दिखने वाली भाजपा के लिए यह घटनाक्रम आत्ममंथन का विषय है, क्योंकि यह जमीनी स्तर पर और ग्रामीण बस्तियों में संगठनात्मक पकड़ कमजोर होने के सीधे संकेत दे रहा है। कांग्रेस में शामिल होने वालों में कई ऐसे चेहरे हैं जिनकी अपने-अपने बूथों और स्थानीय समाज में गहरी पैठ मानी जाती है।
सियासी गलियारों में इस सामूहिक सदस्यता अभियान को सोलन विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की सोची-समझी आक्रामक रणनीति और साल 2027 के विधानसभा चुनावों की समय से पूर्व तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारों की मानें तो यदि कांग्रेस इसी तरह भाजपा के पारंपरिक गढ़ों में सेंध लगाने में कामयाब रही, तो आने वाले समय में सोलन सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और एकतरफा हो सकता है। फिलहाल, सलोगड़ा बस्ती के इस घटनाक्रम ने सोलन की राजनीति के तापमान को पूरी तरह गरमा दिया है।