सोलन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल काम को आसान बनाने के लिए ठीक है, लेकिन इसे अपने जीवन के अहम फैसले लेने की छूट नहीं मिलनी चाहिए। यह अहम सलाह अमेरिकी लेखक और विज्ञान संचारक पेसन आर. स्टीवंस ने शूलिनी विश्वविद्यालय के छात्रों को दी है। मौका था यूनिवर्सिटी में आयोजित एक ऑनलाइन संवाद का, जिसमें करीब 130 छात्रों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इस पूरे कार्यक्रम का समन्वय योगानंद स्कूल ऑफ AI, कंप्यूटर्स एंड डेटा साइंस के प्रमुख डॉ. पंकज वैद्य ने किया।

पेसन आर. स्टीवंस यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के आर्थर सी. क्लार्क सेंटर फॉर ह्यूमन इमेजिनेशन में फेलो हैं। उन्हें पृथ्वी प्रणाली विज्ञान और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में विज्ञान संचार का बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है। हाल ही में उनकी एक किताब ‘Before AI Decides’ आई है। इस किताब का भी यही संदेश है कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत हो जाए, इंसानों को अपनी सोचने-समझने की क्षमता और फैसले लेने का अधिकार पूरी तरह से मशीन के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए।
इस वेबिनार के दौरान शूलिनी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशंस के प्रोफेसर चरणजीत सिंह ने स्टीवंस के साथ ऑनलाइन बातचीत की। इस दौरान AI की चुनौतियों और इसके भविष्य पर खुलकर चर्चा हुई। स्टीवंस ने छात्रों को हमेशा जिज्ञासु बने रहने की सलाह दी। उनका कहना था कि हर नई तकनीक पर सवाल उठाना बहुत जरूरी है। तकनीक का असल मकसद इंसानी सोच और क्षमता को और मजबूत बनाना होना चाहिए, न कि इंसान की जगह लेना।
भारत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां की बड़ी आबादी के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं और इसका सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर तबके पर पड़ता है। उन्होंने युवाओं, शिक्षाविदों और पेशेवरों से अपील की कि वे मिलकर ऐसे प्रोजेक्ट पर काम करें जो लोगों की असल जिंदगी की परेशानियां सुलझा सकें। स्टीवंस ने भरोसा जताया कि अगर युवा पीढ़ी अनुभवी लोगों के साथ मिलकर काम करे, तो इन समस्याओं का कोई न कोई व्यावहारिक और लंबे समय तक चलने वाला समाधान जरूर निकाला जा सकता है।