शिमला: बीबीएमबी (BBMB) एरियर मामले में सर्वोच्च न्यायालय से ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद नई दिल्ली से शिमला लौटने पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का उनके सरकारी आवास ‘ओकओवर’ में लोगों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया।

इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, विधायक हरीश जनारथा व सुरेश कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र कुमार, उप-महापौर उमा कौशल और महाधिवक्ता अनूप रतन समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
प्रदेश के अधिकारों की ऐतिहासिक जीत
पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, मजबूत संकल्प और लगातार किए गए कानूनी व राजनीतिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि बीबीएमबी एरियर का मामला निर्णय आने के बावजूद लगभग 15 वर्षों तक लंबित रहा और पूर्व में कई बार जरूरी जवाब समय पर दाखिल नहीं किए गए। लेकिन वर्ष 2022 में सत्ता में आते ही वर्तमान कांग्रेस सरकार ने इसे प्राथमिकता बनाते हुए बिना किसी दबाव के मजबूती से प्रदेश का पक्ष रखा।
किशाऊ बांध परियोजना और दूरदर्शी रणनीति
मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि इस सफलता की नींव किशाऊ बांध परियोजना से संबंधित समझौते के दौरान ही रख दी गई थी। हिमाचल सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि किशाऊ बांध परियोजना पर तभी आगे बढ़ा जाएगा, जब हरियाणा सरकार बीबीएमबी एरियर मामले में प्रदेश के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल करेगी। शुरुआती आनाकानी के बाद हरियाणा और केंद्र सरकार द्वारा हलफनामा दाखिल किया गया, जिससे हिमाचल के हितों की रक्षा सुनिश्चित हुई।
आर्थिक मजबूती और भविष्य के अनुमान:
बीबीएमबी एरियर: इस ऐतिहासिक फैसले से आगामी 20 वर्षों में प्रदेश को लगभग 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये की आय होने और 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलने का अनुमान है।
बिजली की दरें: सरकार का प्रयास है कि बिजली का ऐसा समझौता किया जाए जिससे उचित मूल्य (लगभग 6 से 10 रुपये प्रति यूनिट) मिले और प्रदेश को सालाना 500 करोड़ की बजाय लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक का आर्थिक लाभ हो सके।
किशाऊ बांध परियोजना: इस परियोजना से आगामी पाँच वर्षों में लगभग 12,000 करोड़ रुपये की आय की संभावना है।
अन्य कानूनी और नीतिगत सफलताएँ
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने केवल बीबीएमबी ही नहीं, बल्कि अन्य मामलों में भी प्रदेश के अधिकारों की रक्षा की है:
वाइल्डफ्लावर हॉल मामला: 23 वर्षों से लंबित इस मामले में जीत के बाद अब प्रदेश के खजाने में नियमित राजस्व आ रहा है।
कड़छम-वांगतु जल विद्युत परियोजना: जेएसडब्ल्यू (JSW) के साथ इस परियोजना में बिजली रॉयल्टी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने के मामले में भी सर्वोच्च न्यायालय में जीत मिली, जिससे सालाना लगभग 150 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलने तय हुए हैं।
वर्ष 2032 तक आत्मनिर्भर हिमाचल का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वर्ष 2032 तक हिमाचल प्रदेश को देश का सबसे समृद्ध और आर्थिक रूप से सशक्त राज्य बनाने के स्पष्ट रोडमैप पर काम कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर राज्य को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। अंत में, उन्होंने प्रदेशवासियों को धनतेरस और दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह जीत हिमाचल प्रदेश के लिए खुशियों और आर्थिक समृद्धि का नया द्वार लेकर आई है।