शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली के प्रचार को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने कहा है कि एक तरफ तो सरकार द्वारा ओपीएस की उपलब्धि का लगातार और बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के वर्षों से लंबित पड़े जायज वित्तीय लाभों का भुगतान नहीं किया जा रहा है, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निराशाजनक और अन्यायपूर्ण है।

नरेश ठाकुर ने कड़े शब्दों में कहा कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) सरकारी कर्मचारियों का एक संवैधानिक और वैधानिक अधिकार है, यह सरकार द्वारा दिया गया कोई विशेष अनुग्रह, तोहफा या खैरात नहीं है। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि सरकार को केवल ओपीएस का राजनीतिक श्रेय लेने में ही व्यस्त नहीं रहना चाहिए, बल्कि कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनरों के अन्य लंबे समय से लटके हुए अधिकारों और वित्तीय देनदारियों के प्रति भी समान रूप से गंभीरता दिखानी चाहिए।
कर्मचारियों की आर्थिक समस्याओं को उजागर करते हुए महासंघ के अध्यक्ष ने बताया कि आज प्रदेश के कर्मचारी और पेंशनर अपने ही हक के लिए तरस रहे हैं। उनके मुख्य वित्तीय अधिकार जैसे महंगाई भत्ता का समय पर भुगतान नहीं हो रहा है। वेतन एवं डीए एरियर भी लंबे समय से फाइलों में दबा हुआ है। संशोधित वेतनमान से जुड़ी विभिन्न श्रेणियों की महत्वपूर्ण देनदारियां अभी तक बकाया हैं।
नरेश ठाकुर ने कहा कि राज्य में आर्थिक तंगी का हवाला देकर सारा आर्थिक बोझ और कटौती केवल कर्मचारियों व पेंशनरों पर डालना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि देवभूमि के लाखों सेवारत कर्मचारी और सेवानिवृत्त पेंशनर वर्तमान में सरकार की इन ढुलमुल नीतियों से सीधे तौर पर प्रभावित और परेशान हैं। सरकार को यह समझना होगा कि केवल बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने, विज्ञापनों और प्रचार-प्रसार करने से कर्मचारियों की वास्तविक व व्यावहारिक समस्याओं का समाधान कभी नहीं होगा। इसके लिए वित्तीय देनदारियों का शीघ्र और वास्तविक भुगतान सुनिश्चित करना होगा।
महासंघ ने प्रदेश सरकार से पुरजोर आग्रह किया है कि वह ओपीएस लागू करने की बात के साथ-साथ कर्मचारियों और पेंशनरों के तमाम लंबित पड़े वित्तीय लाभों का एक निश्चित समय सीमा के भीतर तुरंत भुगतान करे। ऐसा करने से ही कर्मचारियों का सरकार के प्रति विश्वास और तालमेल बना रहेगा, अन्यथा अपने वैध और कानूनी अधिकारों को पाने के लिए कर्मचारियों को बार-बार सड़कों पर उतरकर संघर्ष करने के लिए विवश होना पड़ेगा।