SCERT सोलन में स्कूल प्रिंसिपलों की पांच दिवसीय ट्रेनिंग पूरी

Photo of author

By Hills Post

सोलन: हिमाचल प्रदेश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर और मजबूत बनाने के लिए स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) सोलन में 19 से 23 मई 2026 तक स्कूल प्रिंसिपलों के लिए एक विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस पांच दिवसीय लीडरशिप कार्यक्रम में सोलन, सिरमौर, शिमला, ऊना, किन्नौर और बिलासपुर जिलों के 32 स्कूल प्रिंसिपलों ने हिस्सा लिया।

एस.सी.ई.आर.टी. सोलन की प्राचार्या डॉ. रितु शर्मा सोनी ने कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि ट्रेनिंग के पहले दिन प्रदेश के शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने एक बेहद महत्वपूर्ण सत्र लिया और प्रिंसिपलों से सीधा संवाद किया। उन्होंने अपने संबोधन में साफ कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने में स्कूल प्रमुखों की भूमिका सबसे बड़ी है। शिक्षा सचिव ने बेहतर लीडरशिप, एडमिनिस्ट्रेटिव स्किल और नए तौर-तरीकों पर आधारित पढ़ाई की व्यवस्था करने पर जोर दिया।

इस पांच दिनों के ट्रेनिंग प्रोग्राम में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बात की गई, जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को जमीन पर लागू करना, सीबीएसई (CBSE) पैटर्न, और हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था में नए सुधार। सूचना का अधिकार (RTI)-2025, विभागीय जांच की प्रक्रिया, और कोर्ट केसों का समय पर निपटारा। बच्चों के लर्निंग आउटकम में सुधार, बजट और वित्तीय प्रबंधन, तकनीक का सही इस्तेमाल और समाज की भागीदारी।

ट्रेनिंग के आखिरी दिन स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने प्रिंसिपलों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के दौर में स्कूल मुखिया का काम सिर्फ कागजी या प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उन्हें एक रोल मॉडल और लीडर के रूप में सामने आना होगा। उन्होंने सभी से स्कूलों में अनुशासन, क्वालिटी एजुकेशन और नए प्रयोगों को बढ़ावा देने की अपील की।

इस पूरे ट्रेनिंग प्रोग्राम को बेहतर ढंग से आयोजित करने में समन्वयक प्रो. वीना ठाकुर के साथ सह-समन्वयक प्रो. रंजना शर्मा और सुनीता कुमारी की अहम भूमिका रही। ट्रेनिंग को ज्यादा से ज्यादा व्यावहारिक बनाने के लिए विभाग के तय मॉड्यूल और एक्सपर्ट रिसोर्स पर्सन्स की मदद ली गई।

Photo of author

Hills Post

हम उन लोगों और विषयों के बारे में लिखने और आवाज़ बुलंद करने का प्रयास करते हैं जिन्हे मुख्यधारा के मीडिया में कम प्राथमिकता मिलती है ।