गुवाहाटी: असम ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बार फिर वैश्विक मिसाल कायम की है। राज्य में बीते पूरे वर्ष एक-सींग वाले गैंडे के शिकार (Poaching) का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इससे पहले 2022 में भी असम ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने बताया कि फरवरी 2024 से अब तक, यानी 730 से अधिक दिनों में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में शिकार की कोई घटना नहीं हुई है।

इस सफलता का श्रेय सख्त कानूनों, जन-जागरूकता और पुलिस व वन विभाग के संयुक्त अभियान ऑपरेशन फाल्कन को जाता है। इस अभियान के तहत 42 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया और 6 बड़े गिरोहों का भंडाफोड़ किया गया। सरकार ने अंधविश्वासों को तोड़ने के लिए 2,500 गैंडे के सींगों को सार्वजनिक रूप से नष्ट कर यह संदेश दिया कि इनमें कोई औषधीय गुण नहीं होते।
इस संरक्षण अभियान को और मजबूती देते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जनवरी, 2026 को काजीरंगा में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-715 (NH-715) पर बनने वाली ‘काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना’ का भूमि पूजन किया। लगभग 6,950 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 34.45 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही बिना किसी बाधा के हो सकेगी। इसके अलावा, जाखलाबंदा और बोकाखाट में बाईपास और कालियाबोर से नुमालीगढ़ तक सड़क का चौड़ीकरण भी शामिल है।
काजीरंगा की निदेशक सोनाली घोष ने इसे विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक बेहतरीन संतुलन बताया। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान जब पार्क में पानी भर जाता है, तो जानवर कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियों की ओर पलायन करते हैं। पहले हाईवे पार करते समय कई जानवर वाहनों की चपेट में आ जाते थे, लेकिन अब एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से उन्हें सुरक्षित मार्ग मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने काजीरंगा को ‘असम की आत्मा’ बताते हुए कहा कि यह परियोजना न केवल वन्यजीवों की रक्षा करेगी, बल्कि पूर्वी असम की कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाएगी।