सोलन: राजकीय संस्कृत महाविद्यालय सोलन में भारतीय संस्कृति के संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गौ-संरक्षण एवं वेस्ट पेपर पुनः उपयोग विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा विद्यार्थियों को सनातन संस्कृति में गौ माता के धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व से परिचित करवाने के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा के लिए बेकार कागज के रीसाइक्लिंग के प्रति सचेत व जागरूक करना था।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सुप्रसिद्ध बाल ब्रह्मचारी श्री हेमराज स्वामी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गौ-सेवा और गौ-संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गौवंश का योगदान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय तंत्र में भी गाय की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे गौ-संरक्षण के प्रति अपने नैतिक दायित्वों को समझें और समाज को इसके लिए प्रेरित करें।
इस विशेष अवसर पर गाय को ‘राष्ट्र माता’ घोषित करने की मांग को लेकर एक राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। इस अभियान में महाविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आचार्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने हस्ताक्षर कर इस मुहिम का पुरजोर समर्थन किया।
कार्यक्रम के दूसरे मुख्य सत्र में दिल्ली से विशेष तौर पर पधारे पर्यावरण विशेषज्ञ श्री दिलीप राय ने शिरकत की। उन्होंने व्यावहारिक तरीकों से विद्यार्थियों को समझाया कि किस प्रकार हम अपने घरों और संस्थानों से निकलने वाले वेस्ट पेपर (रद्दी कागज) का पुनः उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कागज के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी और बताया कि कैसे कागज को बर्बाद होने से बचाकर हम वनों की कटाई को कम कर सकते हैं और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्याओं से पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं।
इस जागरूकता कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रमेश शर्मा ने की, जबकि कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. विनय कुमार शर्मा द्वारा किया गया। इस वैचारिक संगोष्ठी के दौरान कॉलेज के समस्त आचार्य और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
समारोह के समापन पर प्राचार्य डॉ. रमेश शर्मा ने दोनों मुख्य वक्ताओं का उनके बहुमूल्य और ज्ञानवर्धक विचारों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान को वे केवल कॉलेज परिसर तक सीमित न रखें, बल्कि गौ-संरक्षण और पर्यावरण चेतना के इस पावन संदेश को समाज के हर घर और अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।