जुबिन गर्ग मौत मामला: क्या जुबीन को न्याय मिलेगा?

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By नव ठाकुरिया

गुवाहाटी: असम के लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग की पिछले वर्ष सिंगापुर में हुई रहस्यमय मौत के मामले में एक नया और पेचीदा मोड़ आ गया है। सिंगापुर पुलिस ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट में जुबिन की मौत को ‘दुर्घटना’ करार देते हुए किसी भी प्रकार की साजिश या आपराधिक पहलू से इनकार किया है। ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में पाया गया कि 53 वर्षीय गायक की मौत नशे की हालत में लाजरस द्वीप के पास समुद्र में तैरते समय डूबने से हुई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके खून में अल्कोहल की मात्रा 333 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर पाई गई, जो कानूनी सीमा से कई गुना अधिक थी। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि जुबिन ने यॉट के कप्तान की सलाह के बावजूद लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था और तैरते समय अचेत हो गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

दूसरी ओर, असम में इस रिपोर्ट के विपरीत सरकार और जांच एजेंसियां इसे एक सुनियोजित साजिश मान रही हैं। जनआक्रोश के बाद असम सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानु महंत, जुबिन के मैनेजर और सुरक्षा कर्मियों सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है। असम पुलिस ने 2,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है और चार आरोपियों पर हत्या का आरोप लगाया है।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सिंगापुर की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि असम पुलिस की जांच अधिक गहन है और वे अपने निष्कर्षों पर कायम हैं। वहीं, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने दोनों जांच एजेंसियों के विरोधाभासी नतीजों पर सवाल उठाते हुए सरकार की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाया है।

इस विरोधाभास के बीच जुबिन का परिवार और उनके लाखों प्रशंसक न्याय की आस लगाए बैठे हैं। जुबिन की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने केंद्र और राज्य सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है ताकि सिंगापुर की अदालती कार्यवाही पर नजर रखी जा सके। उन्होंने मामले की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की भी मांग की है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि सिंगापुर की अदालत आधिकारिक तौर पर इसे दुर्घटना घोषित कर देती है, तो भारत में चल रही हत्या की सुनवाई और एसआईटी के दावों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। यह मामला अब केवल एक सेलिब्रिटी की मौत तक सीमित न रहकर दो देशों की जांच एजेंसियों के बीच साख का सवाल भी बन गया है।

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नव ठाकुरिया

लेखक गुवाहाटी स्थित एक पत्रकार हैं, जो विश्व भर के विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए नियमित रूप से लेखन करते हैं।