डीपीसी और सीएएस की अनदेखी पर भड़के कॉलेज शिक्षक, सोलन कॉलेज में गेट मीटिंग कर जताया कड़ा रोष

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By Hills Post

सोलन: हिमाचल प्रदेश गवर्नमेंट कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन की केंद्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर आज राजकीय महाविद्यालय सोलन की स्थानीय इकाई ने एक बड़ा कदम उठाया है। कॉलेज के प्राध्यापकों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर महाविद्यालय परिसर के बाहर एक गेट मीटिंग का आयोजन किया। इस दौरान शिक्षकों ने विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकों के न होने तथा पात्र कॉलेज शिक्षकों के लिए करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) को अब तक लागू न किए जाने पर गहरी चिंता और भारी रोष व्यक्त किया।

इस महत्वपूर्ण विरोध बैठक की अध्यक्षता एचजीसीटीए स्थानीय इकाई के अध्यक्ष डॉ. बी. एन. कमल ने की, जबकि बैठक की रूपरेखा और मंच संचालन स्थानीय इकाई की सचिव डॉ. मंजू ठाकुर द्वारा किया गया। इस गेट मीटिंग में सोलन कॉलेज के भारी संख्या में प्राध्यापकों और बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया और अपनी जायज मांगों के समाधान में सरकार व उच्च शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही लगातार देरी पर सर्वसम्मति से अपनी गहरी निराशा व असंतोष प्रकट किया।

गेट मीटिंग को संबोधित करते हुए स्थानीय इकाई के अध्यक्ष डॉ. बी. एन. कमल ने दो टूक शब्दों में कहा कि डीपीसी का समयबद्ध आयोजन करना और पात्र शिक्षकों को सीएएस का लाभ देना कोई खैरात नहीं, बल्कि शिक्षकों का कानूनी और वैध अधिकार है। उन्होंने तर्क दिया कि इन मांगों की समय पर पूर्ति होना शिक्षकों के व्यावसायिक विकास, उनके कार्यस्थल पर मनोबल को ऊंचा रखने तथा प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने के लिए बेहद अनिवार्य है। यदि शिक्षक ही अपने अधिकारों के लिए तरसेगा, तो वह पूरे मनोयोग से कार्य कैसे कर पाएगा।

वहीं, स्थानीय इकाई की सचिव डॉ. मंजू ठाकुर ने प्रशासनिक ढर्रे पर सवाल उठाते हुए कहा कि एसोसिएशन द्वारा इन दोनों प्रमुख मांगों को लेकर प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के समक्ष बार-बार लिखित व मौखिक रूप से आग्रह और प्रतिनिधित्व किया जा चुका है। इसके बावजूद आज दिन तक सरकार की ओर से कोई भी ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे पूरे प्रदेश के महाविद्यालय शिक्षकों में व्यापक असंतोष की भावना पनप रही है।

बैठक के अंत में सोलन महाविद्यालय के उपस्थित सभी प्राध्यापकों ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए यह कड़ा संकल्प लिया कि जब तक सरकार शिक्षकों की इन न्यायोचित और बुनियादी मांगों को मानकर इन्हें धरातल पर पूरा नहीं करती, तब तक वे एचजीसीटीए के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार पूरी तरह से शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपने हक की लड़ाई और संघर्ष को निरंतर जारी रखेंगे।

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