नाहन : ऐतिहासिक शहर नाहन के पहचान माने जाने वाले चौगान मैदान के अस्तित्व और उसकी गरिमा को बचाने के लिए व्यापारी अब खुलकर सड़कों पर उतर आए हैं। मैदान में प्रस्तावित व्यावसायिक मेलों और ट्रेड फेयर के आयोजन के खिलाफ सोमवार को शहर के व्यापारी लामबंद दिखाई दिए। व्यापारी एकजुट होकर जिला मुख्यालय पहुंचे और उपायुक्त सिरमौर के माध्यम से प्रशासन को अपनी चिंताओं से अवगत कराते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का साफ तौर पर कहना है कि नाहन का चौगान मैदान महज एक खुला स्थान नहीं, बल्कि रियासतकालीन इतिहास की अनमोल धरोहर है। इसे किसी भी सूरत में व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग उठाई कि मैदान में किसी भी तरह के कमर्शियल ट्रेड फेयर को अनुमति देने पर तुरंत रोक लगाई जाए और इसके मूल स्वरूप को हर हाल में संरक्षित रखा जाए।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे व्यापारी नेताओं ने चौगान मैदान के खेल संबंधी महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह मैदान पूरे नाहन शहर का इकलौता प्रमुख खेल परिसर है, जहां हर दिन सैकड़ों की संख्या में युवा और बच्चे फुटबॉल, क्रिकेट, रनिंग और एथलेटिक्स का अभ्यास करते हैं।
व्यापार मंडल के प्रतिनिधि देवेंद्र अग्रवाल और मनीष अग्रवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारा विरोध किसी सांस्कृतिक, सामाजिक या खेलकूद के आयोजन से बिल्कुल नहीं है। शहर में जनहित के मनोरंजन कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं या सांस्कृतिक मंच सजते हैं तो व्यापारी वर्ग उसका स्वागत करता है। लेकिन जब मैदान को ट्रेड फेयर के नाम पर हफ्तों तक व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दे दिया जाता है, तो इसके दरवाजे अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों के लिए बंद हो जाते हैं।”
उन्होंने कहा कि कमर्शियल मेलों के लंबे शेड्यूल के कारण सेना, पुलिस बल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए शारीरिक अभ्यास कर रहे युवाओं की तैयारियां पूरी तरह ठप हो जाती हैं।
व्यापारियों का मानना है कि चौगान मैदान को अस्थायी दुकानों और व्यापारिक ढांचों में तब्दील करने से न सिर्फ इसकी ऐतिहासिक सुंदरता और सतह को नुकसान पहुंचता है, बल्कि शहर के स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के हितों पर भी इसका सीधा असर पड़ता है।
उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन के जरिए व्यापार मंडल ने प्रशासन से अपील की है कि जनभावनाओं, युवाओं की जरूरतों और ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को ध्यान में रखते हुए चौगान मैदान को केवल खेलकूद और सार्वजनिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ही आरक्षित रखा जाए।