नाहन : जीवन अनिश्चितताओं से भरा है और समय रहते लिया गया एक छोटा-सा फैसला विपरीत परिस्थितियों में परिवार के लिए कितना बड़ा आर्थिक सहारा बन सकता है, इसका एक संवेदनशील उदाहरण हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की त्रिलोकपुर शाखा में देखने को मिला है। यहाँ ग्राम खैरी डाकघर त्रिलोकपुर, जिला सिरमौर की दिवंगत महिला के परिवार को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत ₹2 लाख की बीमा राशि प्रदान की गई है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम खैरी की निवासी स्वर्गीय सीमा देवी ने एचपी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक, शाखा त्रिलोकपुर के माध्यम से केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ के अंतर्गत अपना बीमा करवाया था। इसके लिए वे प्रतिवर्ष मात्र ₹436 का प्रीमियम जमा करती थीं।

दुर्भाग्यवश, गंभीर बीमारी के चलते गत 15 जून 2026 को उनका असामयिक निधन हो गया। वे अपने पीछे पति ऋषिपाल तथा दो बच्चों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गईं। किसी आत्मीय जन के चले जाने का दुख और शून्यता को कोई भी धनराशि पूरी नहीं कर सकती, लेकिन बीमारी के इलाज में हुए भारी खर्च के बाद यह योजना परिवार के लिए आर्थिक संबल सिद्ध हुई।
एचपी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक त्रिलोकपुर के शाखा प्रबंधक विशाल तोमर ने बताया कि जैसे ही दिवंगत महिला के पति ऋषिपाल ने बैंक से संपर्क किया, शाखा द्वारा त्वरित एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सभी आवश्यक औपचारिकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया। बैंक ने तत्काल बीमा दावा उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया, जिसके परिणामस्वरूप 23 जुलाई को ₹2 लाख की पूर्ण बीमा राशि सीधे ऋषिपाल के बैंक खाते में सफलतापूर्वक जमा कर दी गई।
शाखा प्रबंधक विशाल तोमर ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा “किसी अपने को खोने की पीड़ा को कभी कम नहीं किया जा सकता, लेकिन यदि ऐसे कठिन समय में परिवार को आर्थिक सहारा मिल जाए, तो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में कुछ राहत ज़रूर मिलती है। एचपी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक का उद्देश्य केवल बैंकिंग सेवाएँ देना नहीं, बल्कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाकर उन्हें सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान करना है।”
शाखा प्रबंधक ने क्षेत्र के सभी पात्र नागरिकों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं से अधिक से अधिक संख्या में जुड़ें। वर्ष में मात्र ₹436 (यानी प्रतिदिन ₹1.20 से भी कम) का अंशदान किसी अप्रत्याशित संकट के समय परिवार के लिए एक सम्मानजनक और बड़ा आर्थिक संबल बन सकता है।