सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशालय और उच्चतर शिक्षा निदेशालय, शिमला द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत जिला सिरमौर के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा प्रतिभागियों को बागवानी, उद्यान प्रबंधन, पुष्प उत्पादन, नर्सरी प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों से व्यावहारिक रूप से परिचित करवाना तथा उनके वैज्ञानिक ज्ञान व कौशल का सर्वांगीण विकास करना रहा।

प्रतिभागी विद्यालय और व्यापक प्रशिक्षण
इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला सिरमौर के 10 विभिन्न विद्यालयों राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों खूड, कोटला बड़ोग, सैंज, बसांहा, चांदनी, जामू कोटी, करोग, हलां और मिलां से कुल 142 विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकगण व प्रभारियों के साथ सक्रिय रूप से भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान के कई अत्याधुनिक विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें मुख्य रूप से हाई-टेक फ्लोरीकल्चर, आधुनिक सिंचाई प्रणालियों, प्राकृतिक खेती, जीवामृत एवं घनजीवामृत निर्माण, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन, संरक्षित खेती, व्यावसायिक पुष्प उत्पादन, आधुनिक पौधशाला (नर्सरी) तकनीक, फल फसलों में प्रवर्धन (प्रोपगेशन) तथा प्लांट टिश्यू कल्चर जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की विभिन्न शोध व प्रायोगिक इकाइयों का एक्सपोजर विजिट कर इन सभी आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस दौरान उन्हें यह गहराई से समझने का अवसर मिला कि आज के समय में कृषि केवल पारंपरिक उत्पादन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी नवाचार, मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण और उद्यमिता के जरिए रोजगार की असीम संभावनाएं छिपी हैं।
विशेषज्ञों और समन्वयकों का मार्गदर्शन
इस कार्यक्रम के सफल और सुचारू आयोजन में विद्यालयों के अध्यापकों, प्रभारी शिक्षकों और कार्यक्रम समन्वयकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मीनु गुप्ता और डॉ. मनिका तोमर तथा प्रशिक्षण संयोजक डॉ. प्रीति शर्मा ने संबंधित विद्यालयों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर विद्यार्थियों की सहभागिता, समयबद्धता और एक्सपोजर विजिट की सभी व्यवस्थाओं को बेहतरीन तरीके से संचालित किया।
विस्तार शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ. धर्म पॉल शर्मा ने इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज के दौर में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखना बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। कृषि और बागवानी जैसे विशाल संभावनाओं वाले क्षेत्रों में छात्र-छात्राओं को शुरुआती स्तर से ही व्यावहारिक अनुभव देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं में उद्यमिता, नवाचार और स्वरोजगार की सकारात्मक सोच विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
समग्र शिक्षा एवं उच्च शिक्षा निदेशालय के सहयोग से आयोजित यह पहल विद्यार्थियों को स्कूल स्तर से सीधे कार्यक्षेत्र की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। अंत में, उन्होंने सभी सहयोगियों, शिक्षकों और विशेषज्ञों के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस तरह के कौशल-आधारित कार्यक्रमों को लगातार बढ़ावा देने पर जोर दिया।