नाहन : पौष महा की संक्रांति के अवसर पर पश्मी में विराजमान चालदा महासू महाराज के दर्शन करने जन सैलब उमड़ा, पश्मी में इस पावन पर्व पर लगभग बीस हजार लोगों ने शीश नवाया, मकर संक्रांति के दिन देश ही नहीं बल्कि विदेशी लोगों ने भी महासू महाराज के दर्शन किए, श्रद्धांलों के लिए उचित व्यवस्था बनाएं रखने के लिए एसडीएम शिलाई जसपाल ने मौका पर खुद मोर्चा संभाला।
पौष माह की संक्रांति जिसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है, हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक ओर आध्यात्मिक महत्व है, इसलिए इस पवित्र अवसर पर हिन्दू धर्म के लोग मंदिरों में देवी देवताओं की खूब पूजा अर्चना करते है, हिमाचल ओर उत्तराखंड के लोगों में महासू महाराज के प्रति काफ़ी मान्यता है तथा संक्रांति के दिन दोनों प्रदेश से हजारों की संख्या में लोग चालदा महासू महारज के दर्शन करने पश्मी पहुंचे।

इजराइल से पहुंचे श्रद्धांलुओं ने बताया कि वह वाईफ़ाई यूनिवर्सिटी से सम्बन्ध रखते है तथा भारत में आकर वह सिरमौर के इतिहास व परम्पराओं पर एक डोकोमेंट्री त्यार कर रहे है, उन्होंने बताया कि शिलाई के पश्मी चालदा महासू महाराज के दर पर आकर उन्हें अद्भुत अनुभूति का आभास हुआ, पहाड़ों की संस्कृति ओर लोग उन्हें बहुत अच्छे लागे, उन्होंने बताया की चालदा महासू महाराज के दरवार में चल रहे पौष महा की संक्रांति के रात्रि जागरण का हिस्सा बने ओर वहां पहाड़ी संस्कृति खूब भाई और रात भर पहाड़ी परम्परिक पहाड़ी मजूरे का खूब लुफ्त उठाया तथा रात भर पहाड़ी गानों पर खूब नाटी डाली।
हर रोज पश्मी पहुंच रहे हजारों श्रद्धांलुओं के लिए गाड़ियों की पार्किंक भंडारे, व रात्रि ठहराव की उचित व्यवस्था के लिए पश्मी गांव के महिला, बच्चे, बूढ़े व लड़कियां दिल जान से श्रद्धांलुओं की व्यवस्था में पूरा गांव लगा हुआ है, भंडारे में पुरियां बनाने का जिम्मा गांव की लड़कियों ने लिया है, बाकी हर प्रकार की व्यवस्था के लिए गांव का बच्चा बच्चा अपनी सेवा के लिए तैयार रहता है।