बद्दी के कालूझिंडा बाजार को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए उतरे चितकारा यूनिवर्सिटी के NCC कैडेट्स

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By Hills Post

बद्दी: पर्यावरण संरक्षण को एक व्यापक जनआंदोलन बनाने तथा प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते खतरे के प्रति समाज को सचेत करने के उद्देश्य से चितकारा यूनिवर्सिटी, बद्दी की NCC इकाई ने बुधवार को कालूझिंडा मार्केट में एक विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान के तहत एनसीसी कैडेट्स ने पूरे बाजार क्षेत्र में एक प्रभावशाली जागरूकता रैली निकाली और स्थानीय दुकानदारों व आम जनता से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह से बंद करने की पुरजोर अपील की। अभियान को व्यावहारिक रूप देने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से बाजार के दुकानदारों को 400 कागज के बैग भी निशुल्क वितरित किए गए, ताकि प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर इनका उपयोग किया जा सके।

जागरूकता अभियान की शुरुआत एक रैली से हुई, जिसमें NCC कैडेट्स हाथों में पर्यावरण संरक्षण के संदेशों और स्लोगन लिखी तख्तियां व बैनर लेकर कालूझिंडा मार्केट की विभिन्न गलियों से गुजरे। कैडेट्स ने दुकानदारों, ग्राहकों और स्थानीय राहगीरों से सीधा संवाद स्थापित कर प्लास्टिक से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने लोगों को दैनिक जीवन में केवल कपड़े और कागज के थैलों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कैडेट्स ने बताया कि प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग न केवल हमारी धरती को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि जल स्रोतों, बेजुबान वन्यजीवों और मानव स्वास्थ्य के लिए भी एक साइलेंट किलर साबित हो रहा है। उन्होंने सभी से ‘प्लास्टिक मुक्त हिमाचल’ के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।

चितकारा यूनिवर्सिटी के निदेशक (प्रशासन) कर्नल रवि कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए कालूझिंडा मार्केट को गोद लिया हुआ है। इस बाजार में संस्थान द्वारा समय-समय पर विभिन्न जनहित, पर्यावरण और स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियां लगातार आयोजित की जाती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को किताबी व अकादमिक ज्ञान देना ही नहीं है, बल्कि उन्हें समाज के प्रति एक संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक बनाना भी है। इसी सोच के साथ विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करता आ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण आज पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। प्लास्टिक की थैलियां और सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री सैकड़ों वर्षों तक नष्ट नहीं होती, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता नष्ट होती है, नालियां जाम होती हैं और सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं के जीवन पर भी खतरा मंडराता रहता है। यदि प्रत्येक नागरिक अपनी छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर खरीदारी के समय घर से कपड़े का थैला साथ ले जाना शुरू करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बहुत बड़ा सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

एनसीसी अधिकारी अनिल राणा ने इस अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि जागरूकता के साथ-साथ दुकानदारों को व्यावहारिक विकल्प देने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए 400 कागज के बैग वितरित किए गए। बाजार के प्रत्येक दुकानदार को लगभग 25 से 30 बैग दिए गए और उनसे यह अनुरोध किया गया कि वे अपने पास आने वाले ग्राहकों को सामान प्लास्टिक के बजाय इन्हीं थैलियों में दें। उन्होंने कहा कि एनसीसी का मुख्य उद्देश्य युवाओं में कड़ा अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना पैदा करना है। ऐसे अभियानों में भाग लेकर कैडेट्स समाज के लिए एक रोल मॉडल के रूप में सामने आते हैं।

कालूझिंडा बाजार के स्थानीय दुकानदारों और व्यापार मंडल ने चितकारा यूनिवर्सिटी व एनसीसी की इस अनूठी पहल की मुक्त कंठ से सराहना की। दुकानदारों ने विश्वास दिलाया कि वे भविष्य में प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग को कम से कम करेंगे और ग्राहकों को भी अपने घरों से कपड़े के थैले लाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। कार्यक्रम के अंत में एनसीसी कैडेट्स ने ‘प्लास्टिक मुक्त एवं स्वच्छ हिमाचल’ के निर्माण के संकल्प को दोहराया और कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल एक दिन का औपचारिक अभियान नहीं बल्कि निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है।

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