महाशिवरात्रि स्पेशल: रानीताल का वह शिवालय जहाँ आज भी ज़िंदा है रानी की याद और आस्था

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By पंकज जयसवाल

नाहन : हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक शहर नाहन की पहचान यहाँ की रियासतकालीन धरोहरों से है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शहर के बीचों-बीच स्थित ‘रानीताल शिव मंदिर’ का इतिहास क्या है? महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आज HillsPost आपको रूबरू करवा रहा है नाहन के उस स्थान से, जहाँ आस्था, इतिहास और प्रेम की एक अनूठी कहानी छिपी है।

इतिहास के पन्नों में दर्ज है प्रमाण
अक्सर लोग रानीताल को एक सुंदर पार्क के रूप में जानते हैं, लेकिन इसका ऐतिहासिक आधार बहुत गहरा है। कंवर रणजौर सिंह द्वारा लिखित प्रामाणिक पुस्तक ‘सिरमौर रियासत का इतिहास’ के अनुसार, इस बाग और भव्य शिवालय का निर्माण महाराजा शमशेर प्रकाश ने अपनी रानी कुटलानी की याद में करवाया था। इस धरोहर का निर्माण विक्रमी संवत 1944 (सन 1889) में पूरा हुआ था।

मंदिर परिसर में ही एक प्राचीन कुआँ भी मौजूद है, जिसकी गहराई लगभग 90 फीट है। रियासत काल के दौरान यह कुआँ मंदिर और बाग की ज़रूरतों को पूरा करता था। कंवर रणजौर सिंह द्वारा लिखित पुस्तक के अनुसार यह कुआँ कुमाऊं वाली रानी ने बनाया था, जो मंदिर के बहुत निकट है।

‘Gazetteer of the Sirmur State’ (1904) ब्रिटिश काल के इस आधिकारिक दस्तावेज़ में ज़िक्र है कि नाहन के इन बागों और मंदिरों को आधुनिक स्वरूप महाराजा शमशेर प्रकाश के कार्यकाल में मिला। इसमें रानीताल के सौंदर्यीकरण और इसकी वास्तुकला की तुलना उस दौर के यूरोपीय बागों से की गई है।

History of the Punjab Hill States’ (लेखक: जे. हचिसन और जे.पी. वोगेल): इतिहासकारों की इस मशहूर जोड़ी ने अपनी किताब में सिरमौर रियासत के स्थापत्य (Architecture) का ज़िक्र करते हुए नाहन के धार्मिक स्थलों की महत्ता बताई है। इसमें संकेत मिलते हैं कि रानीताल के इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व महाराजा शमशेर प्रकाश से भी पहले, राजा कर्ण प्रकाश (1687) के समय से जुड़ा रहा है।

एकादश रुद्र: जहाँ 11 रूपों में विराजते हैं महादेव
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान 1000 वर्ष पुराना माना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी आध्यात्मिक विशेषता इसके गर्भगृह में स्थापित “एकादश रुद्र शिवलिंग” हैं। एक ही स्थान पर भगवान शिव के 11 रूपों के दर्शन होना भक्तों के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है।

उत्सवों की जीवंत परंपरा
नाहन की संस्कृति में इस मंदिर का स्थान सर्वोच्च है। यहाँ महाशिवरात्रि पर निकलने वाली भव्य शोभायात्रा और शिव बारात पूरे शहर को एक सूत्र में पिरो देती है। सावन के महीने में यहाँ होने वाला जलाभिषेक और विशेष पूजा आज भी उसी श्रद्धा के साथ की जाती है, जैसी सदियों पहले रियासत के दौर में होती थी।

आज जब हम नाहन की विरासत की बात करते हैं, तो रानीताल का यह शिवालय प्रशासन और जनता के बीच के सामंजस्य का एक सुंदर उदाहरण पेश करता है। महाशिवरात्रि के इस शुभ अवसर पर HillsPost आप सभी के लिए महादेव से सुख और समृद्धि की कामना करता है।

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पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।