शिमला: पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में हिमाचल प्रदेश की शिमला यूनिवर्सिटी (एपीजी) ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कामयाबी अपने नाम की है। यूनिवर्सिटी को “भारत पर्यावरण प्रोग्राम” के तहत कैंपस में पर्यावरण संरक्षण अभियान, साफ-सफाई, पौधरोपण, रीसाइक्लिंग, ग्रीन एनर्जी और बेहतरीन कचरा प्रबंधन के लिए सम्मानित किया गया है। इस शानदार प्रदर्शन के लिए शिमला यूनिवर्सिटी को “गोल्ड सस्टेनेबल कैंपस पार्टनर” का प्रतिष्ठित दर्जा दिया गया है, जो पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

भारत सरकार द्वारा पृथ्वी सप्ताह के दौरान 22 से 29 अप्रैल 2026 तक ‘भारत सस्टेनेबिलिटी कैंपस मिशन 2026’ नाम से एक महा-अभियान चलाया गया था। इस कार्यक्रम का आयोजन रिसर्च हाइट्स फाउंडेशन हैदराबाद द्वारा एनवायरमेंट प्रोटेक्शन ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (EPTRI) के सहयोग से किया गया था। इस मिशन में देश भर की लगभग चार सौ यूनिवर्सिटीज ने भाग लिया था, जहां शिमला यूनिवर्सिटी ने पर्यावरण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता साबित करते हुए यह मुकाम हासिल किया। यूनिवर्सिटी को 1 जून 2026 को रिसर्च हाइट्स फाउंडेशन द्वारा आधिकारिक सर्टिफिकेट जारी कर सम्मानित किया गया है।
एनएसएस स्वयंसेवियों और स्टाफ की मेहनत लाई रंग
यूनिवर्सिटी कैंपस को हरा-भरा और स्वच्छ रखने के साथ-साथ रीसाइक्लिंग और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अनुकरणीय काम किया गया है। ‘सस्टेनेबल भारत’ के इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए एनएसएस (NSS) के स्वयंसेवियों, छात्रों, प्रोफेसरों और डीन ने मिलकर कड़ी मेहनत की है। एनएसएस प्रोग्राम अधिकारी डॉ. प्यार ठाकुर ने कहा कि यह सिर्फ एक अवार्ड नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए विश्वविद्यालय की एक बड़ी पहल और प्रेरणा है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान, प्रो-चांसलर प्रो. रमेश चौहान, सलाहकार इंजीनियर सुमन विक्रांत और रजिस्ट्रार प्रो. आर.एल. शर्मा ने खुशी जाहिर की है। इसके साथ ही डीन एकेडमिक्स प्रो. डॉ. आनंदमोहन शर्मा, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. डॉ. नीलम शर्मा, डीन फैकल्टी प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा, एसोसिएट डीन एकेडमिक्स डॉ. ज्योत्सना शर्मा, डीन डॉ. मनिंदर कौर और यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने एनएसएस यूनिट, विद्यार्थियों और शिक्षकों को इस सफलता के लिए बधाई दी है।