नाहन : जिला सिरमौर के पच्छाद उपमंडल के तहत सराहां के समीप स्थित प्रसिद्ध शनि मंदिर में शनिवार को शनि जयंती का पावन पर्व बेहद हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने कतारों में खड़े होकर शनिदेव के दर्शन किए और तेल, तिल व नीले फूल अर्पित कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। इस विशेष दिन को लेकर मंदिर में व्यापक तैयारियां की गई थीं, और मंदिर कमेटी द्वारा एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस वर्ष के महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। मंदिर के पुजारी गौतम डकौत ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार की शनि जयंती को अलौकिक बनाने के लिए करीब एक सप्ताह पूर्व महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल ‘शनि शिंगणापुर’ से विशेष रूप से एक पवित्र अखंड ज्योति (जोत) यहां लाई गई है। यह दिव्य जोत मंदिर में निरंतर प्रज्वलित है, जिसके दर्शन और आशीर्वाद के लिए क्षेत्र के लोगों में भारी उत्सुकता देखी जा रही है। इस अखंड ज्योति की मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र के वातावरण को भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया है।

धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से साल 2026 की यह शनि जयंती बेहद असाधारण और खास मानी जा रही है। ज्योतिषियों के अनुसार, पूरे 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक ऐसा दुर्लभ संयोग बना है, जब शनि जयंती स्वयं शनिवार के दिन ही पड़ी है। चूंकि शनिवार का दिन भगवान शनिदेव को ही समर्पित होता है, इसलिए इस दिन उनकी जयंती का आना ‘सोने पर सुहागा’ माना जाता है। इसके अतिरिक्त, ग्रहों के गोचर के कारण करीब 300 साल बाद एक ऐसा महासंयोग भी बना है, जिसमें सूर्य-बुध की युति से बनने वाला बुद्धादित्य योग, गजकेसरी योग, शश महापुरुष योग और सौभाग्य योग एक साथ सक्रिय हो रहे हैं।
हिंदू धर्मग्रंथों में शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ऐसे दुर्लभ महासंयोग के दिन की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। जिन लोगों पर वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव चल रहा है, उनके लिए यह दिन किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। इस विशेष मुहूर्त में विधि-विधान से की गई आराधना, तेल के दीप का दान और मंत्रों के जाप से शनि दोष के नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो जाते हैं। इसके साथ ही मानसिक तनाव, आर्थिक तंगी और लंबे समय से चल रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए भी इस शुभ घड़ी में की गई पूजा कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली साबित होगी।