नाहन : एक तरफ देश तेजी से विकास पथ पर आगे बढ़ने और ‘विश्व गुरु’ बनने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं सिरमौर जिले के रेणुका विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले कियारी गांव में आज भी ग्रामीण और स्कूली बच्चे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। डिजिटल भारत और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के इस दौर में कियारी गांव के लोगों के लिए उफनती नदी पार करना और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना किसी जंग जीतने से कम नहीं है।
क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के चलते उफनती नदी ने गांव का संपर्क पूरी तरह से काट दिया था। स्थिति यह रही कि उफान के कारण गांव के नन्हे-मुन्ने बच्चे करीब आठ दिनों तक स्कूल नहीं पहुंच सके और उनकी पढ़ाई पूरी तरह से ठप रही। शुक्रवार को जब नदी का जलस्तर थोड़ा कम हुआ, तब अभिभावकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर और बच्चों का हाथ कसकर थामते हुए उन्हें नदी पार करवाई और स्कूल पहुंचाया। सामने आई तस्वीरें प्रशासनिक दावों और स्थानीय व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांव का संपर्क शेष दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। शिक्षा हासिल करने के लिए बच्चों को हर दिन मौत के इस मुहाने को पार करना पड़ता है। इतना ही नहीं, गांव के लिए उपलब्ध अन्य वैकल्पिक मार्ग भी खस्ताहाली और अनदेखी के चलते बंद पड़े हैं। गांव में जारी सड़क निर्माण कार्य भी प्रशासनिक सुस्ती के कारण बीच में ही रुक गया है, जिससे क्षेत्रवासियों की परेशानियां और अधिक बढ़ गई हैं।
इस पूरी अव्यवस्था के बीच सबसे गंभीर सवाल किसी आपात स्थिति या मेडिकल इमरजेंसी को लेकर खड़ा होता है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि बरसात के दौरान गांव में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए या किसी गर्भवती महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की नौबत आए, तो उफनती नदी के बीच से उसे ले जाना किसी हादसे को न्योता देने जैसा है। ग्रामीणों ने सरकार, स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से पुरजोर मांग की है कि कियारी गांव की इस समस्या का तुरंत स्थायी समाधान किया जाए। रुका हुआ सड़क निर्माण जल्द पूरा हो और नदी पर एक सुरक्षित पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि मासूमों का भविष्य सुरक्षित हो सके।