सोलन में कवियों ने कविताओं, गीत और गजल से बांधा समा

Photo of author

By Hills Post

सोलन: कनाडा के टोरंटो शहर में रहने वाले सोलन के कवि व साहित्यकार योगेश मंमगाई की अध्यक्षता में रविवार को यहां कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने कविताओं, गीत, गजलों के माध्यम से समा बांधा। विदेश में रहकर भी हिन्दी साहित्य सृजन में अपनी अहम भूमिका निभा रहे योगेश मंमगाई की कविता की बानगी कुछ इस तरह थी… सुंगध मेरी माटी कविता के माध्यम से भारत की समृद्ध परंपरा और संस्कारों का उल्लेख किया, वहीं दूसरी कविता में उन्होंने राम की व्याख्या और आज के संदर्भ पर तीखा तंज कसा। उन्होंने फरमाया कि राम जब धरा पर  जन्म का तुम मन विचारों, सूर्यवंशी नहीं अब कोख शबरी की तुम संवारो।

हेमंत अत्री की हिन्दी कविता प्रकृति रही है दहाड़, फिर दरक रहे पहाड़ और पहाड़ी कविता मोबाइल फोनो रा नजारा और गागुटी के माध्यम से तालियां बटोरी। डॉ कुल राजीव पंत ने बादल के गीत कविता के माध्यम से प्रकृति का सजीव चित्रण किया। वरिष्ठ लेखिका कौमुदी ढल ने चव्वनी चली गई कविता के माध्यम से सभी का ध्यान खींचा। डॉ. प्रेम लाल गौतम ने अपने पद के माध्यम से  वाहवाही लूटी। बिलासपुर से आए लेखक रत्नचंद निर्झर ने अपना यात्रा संस्समरण नेकी कर दरिया में डाल सुनाया।

डॉ अर्चना पंत ने नारी सशक्तिकरण पर जोश भरी कविता पढ़ी,  उठ नारी अब जाग जरा, क्यों सहमी अकुलाई सी।  ध्यान सिंह चौहान ने अपने सिरमौरी गीत वाहवाही लूटी। लेखक व साहित्यकार डॉ दमन आहूजा ने अपने साहित्य से जुड़े संस्समरण सुनाए। उन्होंने कहा कि उनकी पांचवी किताब न बंधन ,न मुक्ति का शीघ्र विमोचन होगा। इसके अलावा पूर्व नप अध्यक्ष सोलन कुल राकेश पंत, यशपाल कपूर और प्रदीप मंमगाई ने भी कविता पाठ किया।

Photo of author

Hills Post

हम उन लोगों और विषयों के बारे में लिखने और आवाज़ बुलंद करने का प्रयास करते हैं जिन्हे मुख्यधारा के मीडिया में कम प्राथमिकता मिलती है ।