शिमला: हिमाचल प्रदेश को हरित राज्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। हमीरपुर जिले के नेरी में देश का पहला स्वदेशी ‘बायोचार संयंत्र’ (Biochar Plant) स्थापित किया जा रहा है। यह अनूठी परियोजना पर्यावरण संरक्षण में मील का पत्थर साबित होने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए रास्ते खोलेगी।

हमीरपुर जिले के नेरी और जाहू में दो बायोचार संयंत्र स्थापित करने के लिए पिछले वर्ष अगस्त माह में डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (नौणी), वन विभाग और प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (चेन्नई) के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता (MoU) हुआ था। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की समीक्षा की।
2.50 रुपये किलो खरीदी जाएंगी चीड़ की पत्तियां
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत जंगलों में आग का कारण बनने वाली चीड़ की पत्तियों (पाइन नीडल्स), लैंटाना (झाड़ी), बांस और अन्य पौधों के बायोमास का उपयोग करके बायोचार (एक प्रकार का पर्यावरण-अनुकूल चारकोल) तैयार किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर एकत्रित बायोमास को 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है। जो लोग अच्छी गुणवत्ता का बायोमास लाएंगे, उन्हें परफॉर्मेंस के आधार पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना वन संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, वनाग्नि को रोकने और राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन क्रेडिट दिलाने में मददगार होगी। अगले 10 वर्षों में इस परियोजना से लगभग 28,800 कार्बन क्रेडिट जेनरेट होने का अनुमान है, जिससे राज्य की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी।
50,000 हेक्टेयर में चलेगा विशेष कृषि-वानिकी अभियान
राज्य में कृषि और वनों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए ‘हिम एवरग्रीन इंटीग्रेटेड क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड एग्रो-फॉरेस्ट्री’ कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसके तहत खेती के साथ-साथ पेड़ लगाने (कृषि-वानिकी) को बढ़ावा दिया जाएगा। यह कार्यक्रम प्रदेश के 50,000 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में लागू होगा, जिससे लगभग 1.35 करोड़ (13.5 मिलियन) टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम या प्रबंधित करने में मदद मिलेगी।
इस योजना से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी, जैव विविधता सुरक्षित होगी और किसानों को लंबे समय तक कमाई के साधन मिलेंगे। इस पूरे कार्यक्रम की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जीआईएस (GIS), रिमोट सेंसिंग और डिजिटल डेटा संग्रह प्रणाली जैसी हाईटेक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र के पूर्व निदेशक ने की हिमाचल की तारीफ
समीक्षा बैठक में विशेष रूप से मौजूद संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के पूर्व कार्यकारी निदेशक और प्रोक्लाइम के सलाहकार मंडल के सदस्य एरिक सोलहाइम ने जलवायु संकट से निपटने के लिए हिमाचल सरकार के वैज्ञानिक और जमीनी प्रयासों की जमकर सराहना की।
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला और प्रोक्लाइम के संस्थापक एवं सीईओ केविन कुमार कंदासेमी सहित कई अन्य अधिकारी व विशेषज्ञ उपस्थित रहे।