सोलन: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला स्थित घड़ासर गांव में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के मौके पर एक खास जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह पहल बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) के हाई एल्टीट्यूड वेस्टर्न हिमालयन रीजनल सेंटर नौणी, सोलन द्वारा की गई। इस बार कार्यक्रम की थीम स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव रखी गई थी, जिसका मुख्य मकसद ग्रामीण इलाकों में प्रकृति और पौधों के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।

कार्यक्रम की शुरुआत बी.एस.आई. सोलन के प्रमुख डॉ. कुमार अम्बरीश के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने जैव विविधता की अहमियत समझाते हुए पर्यावरण को बचाने में ग्रामीणों के अब तक के योगदान की तारीफ की। इसके बाद मुख्य अतिथि डॉ. रवनीत सिंह (OC, ZSI सोलन) ने ग्रामीणों को वन्य जीव संसाधनों की जानकारी दी और उन पर मंडरा रहे खतरों के प्रति सचेत किया। कार्यक्रम का पूरा संचालन और समन्वय डॉ. के.एस. डोगरा द्वारा किया गया।
गांव के ही जिया लाल ठाकुर ने इस पहल के लिए बीएसआई की टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से स्थानीय लोगों को प्राकृतिक संसाधनों और पेड़-पौधों की देखभाल करने की प्रेरणा मिलती है।
इस आयोजन को केवल चर्चा तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि जमीनी स्तर पर भी कदम उठाए गए। ग्रामीणों को चारा, औषधीय और इमारती लकड़ी से जुड़े कुल 70 पौधे बांटे गए। पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक के रूप में गांव के मंदिर के पास एक भोजपत्र का पौधा भी लगाया गया। पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण में योगदान देने के लिए गांव के एक बुजुर्ग महिला और एक बुजुर्ग पुरुष को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम में घड़ासर गांव के 60 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। मौके पर बीएसआई सोलन के कर्मचारी ब्रजेश मीणा, आसिम अली, रितिश कुमार सिंह, संजीव कुमार और हिमानी शर्मा भी मौजूद रहे। संस्थान ने ग्रामीण स्तर पर इस तरह के सफल आयोजन के लिए अपने निदेशक डॉ. कनाड दास का विशेष आभार व्यक्त किया।