हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की नई परिभाषा लिख रहे हैं ये 4 विशेष संस्थान

चम्बा: दूरदराज और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले जनजातीय क्षेत्र पांगी (किलाड़) में बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें देश की बेहतरीन शिक्षा प्रदान करने में ‘एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल’ (EMRS) मील का पत्थर साबित हो रहा है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) द्वारा प्रवर्तित यह संस्थान मेधावी जनजातीय (Tribal) छात्रों के लिए कक्षा छठी से लेकर 12वीं तक 100% मुफ्त आवासीय शैक्षणिक सुविधा प्रदान कर रहा है।

हाल ही में ‘हिल्स पोस्ट’ (Hills Post) मीडिया की टीम ने एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) परिसर का विशेष दौरा किया। इस दौरान संस्थान के प्रिंसिपल देश राज ने ‘हिल्स पोस्ट’ के साथ एक खास बातचीत में स्कूल की अनूठी कार्यप्रणाली, बच्चों को मिल रही आधुनिक सुविधाओं और इस महत्वाकांक्षी योजना के दूरगामी व सकारात्मक परिणामों पर विस्तृत प्रकाश डाला।

सीबीएसई (CBSE) पैटर्न पर शिक्षा और अत्याधुनिक सुविधाएं
प्रिंसिपल देश राज ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई का पूरा ढांचा CBSE पैटर्न पर आधारित है। भारत सरकार की इस विशेष योजना के तहत स्कूल में प्रवेश पाने वाले जनजातीय बच्चों को रहने, खाने-पीने से लेकर स्कूल ड्रेस, जूते, कॉपियां-किताबें और अन्य सभी जरूरी दैनिक सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त (100% Free) प्रदान की जाती हैं।

स्पोर्ट्स और कल्चरल एक्टिविटीज में नेशनल तक बिखेरा जलवा
संस्थान का उद्देश्य बच्चों का केवल शैक्षणिक विकास करना ही नहीं, बल्कि उनका सर्वांगीण विकास करना है। यही वजह है कि यहाँ के बच्चे खेलकूद (Sports) और सांस्कृतिक गतिविधियों (Cultural Activities) में न केवल राज्य स्तर पर, बल्कि नेशनल लेवल (राष्ट्रीय स्तर) पर भी कई खिताब जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं।

प्रिंसिपल देश राज ने बताया कि पूरे भारतवर्ष में इस योजना के तहत ऐसे कुल 740 स्कूल प्रस्तावित हैं, जिनमें से 728 स्कूल वर्तमान में पूरी तरह फंक्शनल (सक्रिय) हो चुके हैं। यदि हिमाचल प्रदेश की बात करें, तो प्रदेश के सुदूर जनजातीय क्षेत्रों में इस तरह के कुल 4 स्कूल सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। इनमें जिला चम्बा के पांगी (किलाड़) और भरमौर, जिला किन्नौर के निचार तथा जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में चल रहे एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल शामिल हैं, जो इन क्षेत्रों के बच्चों को तराशने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पांगी स्थित स्कूल का अभी अपना निजी भवन व इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है। वर्तमान में यह स्कूल शेयरिंग बेसिस पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल) किलाड़ के भवन में ही सुचारू रूप से चल रहा है, जिन्होंने संस्थान को अपना बुनियादी ढांचा उपलब्ध करवाया है।

एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर मिलता है दाखिला
यह योजना विशेष रूप से जनजातीय (ST) वर्ग के मेधावी बच्चों के कल्याण के लिए समर्पित है। यदि किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चम्बा या अन्य किसी भी अधिसूचित क्षेत्र का जनजातीय बच्चा यहाँ प्रवेश लेना चाहता है, तो इसके लिए एक स्टेट लेवल एंट्रेंस टेस्ट (प्रवेश परीक्षा) का आयोजन किया जाता है। इस प्रतियोगी परीक्षा को पास करने के बाद ही बच्चों को मेरिट के आधार पर दाखिला मिलता है।

संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत हुई स्थापना
गौरतलब है कि देश के जनजातीय समाजों के उत्थान और कल्याण के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) प्रणाली की रूपरेखा तैयार की गई थी। नौवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान केंद्र सरकार ने देश के जनजातीय क्षेत्रों में 100 ऐसे स्कूल खोलने की मंजूरी दी थी। इसी कड़ी में साल 2018 में पांगी (चम्बा) के लिए यह स्कूल स्वीकृत हुआ और साल 2019 से इसे क्रियाशील (Operational) कर दिया गया।

एकसमान समाज का निर्माण ही मुख्य लक्ष्य:

यह स्कूल पूरी तरह से सह-शिक्ष्यात्मक (Co-Educational) है, संस्थान का मुख्य ध्येय समाज में किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त कर एक समतामूलक सामाजिक व्यवस्था की स्थापना करना है। इस स्कूल का उद्देश्य बच्चों को अत्याधुनिक व आधुनिक शिक्षा देने के साथ-साथ उनके भीतर सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखना है, ताकि वे भविष्य में चाहे जिस मुकाम पर भी पहुँचें, अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और परंपराओं से हमेशा जुड़े रहें।

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पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।