सोलन: हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति का तीन दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन शुक्रवार को सोलन के कोठों स्थित कला केंद्र सभागार में बेहद उत्साह के साथ शुरू हो गया। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में हिमाचल प्रदेश सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक सानन ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
अपने संबोधन में दीपक सानन ने कहा कि हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति प्रदेश का एक बहुत बड़ा और प्रभावी संगठन है, जिसका नेटवर्क पूरे राज्य में फैला हुआ है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और नशामुक्ति जैसे गंभीर विषयों पर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर बड़े स्तर पर कार्य करने के लिए समिति के प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने रेखांकित किया कि संगठित होकर ही हम सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटा सकते हैं, जब आम लोग, सामाजिक संगठन और सरकार मिलकर कदम उठाते हैं, तो उसके परिणाम हमेशा सकारात्मक और दूरगामी होते हैं।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ संगठन के पारंपरिक और प्रेरणादायी गीत के साथ हुआ, जिसके बाद प्रोफेसर टी.डी. वर्मा ने सम्मेलन में पहुंचे सभी अतिथियों, बुद्धिजीवियों और प्रतिनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके उपरांत, एडवोकेट मनोज वर्मा ने सोलन जिले के ऐतिहासिक विकास और वर्तमान समय की प्रमुख चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की।
उद्घाटन सत्र का मुख्य आकर्षण प्रणव थिएटर बियोंड थिएटर सोलन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया एक बेहद भावुक और आंखें खोलने वाला नुक्कड़ नाटक रहा। संजीव अरोड़ा के कुशल निर्देशन में तैयार इस नाटक के माध्यम से कलाकारों ने समाज में पैर पसार रही नशे की भयावह बुराइयों, विशेषकर आज के दौर के सबसे घातक और प्रचलित नशे ‘चिट्टा’ के कारणों पर गहरी चिंता व्यक्त की। नाटक में दिखाया गया कि किस तरह युवा पीढ़ी इस जानलेवा नशे के जाल में फंसती जा रही है, इससे उन्हें कैसे बचाया जाए, इस मुहिम में परिवार का क्या सहयोग होना चाहिए और नशामुक्ति केंद्र किस तरह पीड़ित युवाओं को मुख्यधारा में लाने का कार्य करते हैं। नाटक में गुलाब सिंह ने बेहतरीन संगीत दिया, जबकि मुख्य कलाकारों में हेमंत अत्री, सोनू, निगम, योगिता, अमन और अंजलि शामिल रहे। कलाकारों ने पुराने पारंपरिक नशों से लेकर आधुनिक दौर के भयावह नशे ‘चिट्टा’ तक के सफर को जीवंतता से मंच पर उतारा, जिसने सभागार में मौजूद सभी दर्शकों और बुद्धिजीवियों को सोचने पर विवश कर दिया।
समिति के महासचिव सत्यवान पुंडीर ने सम्मेलन की प्रगति पर जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में चल रहे खराब और विपरीत मौसम के बावजूद इस महाधिवेशन में हिमाचल के सभी जिलों से लगभग 250 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में संगठन की भविष्य की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, समाज में वैज्ञानिक सोच और चेतना को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी तथा सामाजिक सरोकारों व जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। पदाधिकारियों का दृढ़ विश्वास है कि यह सम्मेलन प्रदेश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को मजबूत करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
इस गरिमामयी अवसर पर उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से जन विज्ञान आंदोलन से जुड़े नामी विशेषज्ञ और बुद्धिजीवी मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिनमें आशा मिश्रा, काशी नाथ चटर्जी, प्रो. प्रमोद गौरी, डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, सुमित्रा चंदेल, मनीषा हंस, पूर्व आईएएस अधिकारी शरभ नेगी, प्रो. जी.डी. गुलाटी, डॉ. बी.एस. पंवार, ईएनसी जोगिंद्र चौहान, डॉ. आर.के. अग्रवाल, सीताराम ठाकुर, उर्मिल ठाकुर और सुदेश ठाकुर सहित विभिन्न जिलों से आए गणमान्य प्रतिनिधि शामिल रहे।