सोलन: शूलिनी यूनिवर्सिटी के योगानंद स्कूल ऑफ़ एआई, कंप्यूटर्स एंड डेटा साइंसेज ने IIIT ऊना और IIT रोपड़ के टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (iHub AWaDH) के साथ मिलकर सोमवार को ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरेक्शन और कॉग्निटिव कंप्यूटिंग (HCICC-2026) पर दूसरी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया। इस उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भारत सहित विदेशों से आए नामी शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के पेशेवरों और छात्रों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान सभी विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरेक्शन, कॉग्निटिव कंप्यूटिंग, हेल्थकेयर और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हो रहे हालिया बदलावों तथा भविष्य की असीम संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन समारोह के साथ हुई, जिसके बाद इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी फैकल्टी के डीन प्रो. वीरेंद्र रिहानी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए शूलिनी यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रो. पी. के. खोसला ने वास्तविक दुनिया की जटिल समस्याओं को हल करने में रिसर्च और इनोवेशन की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने युवा छात्रों और शोधकर्ताओं को ऐसी तकनीक व समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिससे समाज को सीधे तौर पर लाभ पहुंच सके। वहीं कॉन्फ्रेंस के मुख्य अतिथि प्रो. एच. एस. बावेजा ने विभिन्न शिक्षण व तकनीकी संस्थानों के बीच आपसी सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि ज्ञान को आगे बढ़ाने और समकालीन चुनौतियों का सामना करने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग (इंडस्ट्री) और अनुसंधान संगठनों के बीच मजबूत साझेदारी समय की मांग है।
शूलिनी यूनिवर्सिटी में इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के प्रेसिडेंट प्रो. आशीष खोसला ने अलग-अलग क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर बात की। उन्होंने ऐसी तकनीक विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया जो पूरी तरह से जिम्मेदार, नैतिक (एथिकल) और इंसानी जरूरतों पर केंद्रित हो। इसी सत्र में आईआईटी रोपड़ के ‘iHub AWaDH’ के प्रतिनिधियों ने एआई रिसर्च के नए अवसरों, इनोवेशन इकोसिस्टम और उभरते तकनीकी घटनाक्रमों की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य आकर्षण प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा दिए गए कीनोट लेक्चर रहे, जिसमें भरोसेमंद एआई सिस्टम, ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI), एंबेडेड सिस्टम, हेल्थकेयर में एआई, शिक्षा व कहानी कहने में वर्चुअल रियलिटी की उपयोगिता, एआई-असिस्टेड सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग तथा एकेडमिक पब्लिशिंग में एआई की भूमिका जैसे गंभीर विषयों पर गहन मंथन हुआ।
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर कीनोट स्पीकर्स एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी (USA) से डॉ. लिन आर. कार्टर, आईआईटी दिल्ली से डॉ. तपन कुमार गांधी, आईआईटी रुड़की से डॉ. सुदीप रॉय, एम्स (AIIMS) बिलासपुर से डॉ. तरुण शर्मा व डॉ. कपिल शर्मा, आईआईटी मंडी से डॉ. वरुण दत्त और टेलर एंड फ्रांसिस ग्रुप से डॉ. गगनदीप सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने वर्षों के अनुभव और रिसर्च के नतीजे साझा किए, जिससे प्रतिभागियों को एआई के व्यावहारिक इस्तेमाल और भविष्य के सुनहरे मौकों की एक बेहतर समझ मिली। कॉन्फ्रेंस का पहला दिन कई इंटरैक्टिव चर्चाओं के साथ संपन्न हुआ, जिसमें एआई और कॉग्निटिव कंप्यूटिंग के भविष्य को एक नया आकार देने के लिए सामूहिक व सहयोगी प्रयासों की आवश्यकता पर विशेष प्रकाश डाला गया।