नाहन : हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, साहित्यिक और लोक कला धरोहर को सहेजने वाली अग्रणी संस्था ‘हि.प्र. सिरमौर कला संगम’ का 67वां महा-अलंकरण समारोह आज गुरु स्थान बायरी (ददाहू) में भव्यता के साथ संपन्न हुआ। यह प्रतिष्ठित समारोह संस्था के संस्थापक, प्रख्यात बहुआयामी व्यक्तित्व व ‘पहाड़ी मृणाल’ उपनाम से प्रसिद्ध ब्रह्मलीन आचार्य चन्द्रमणि वशिष्ठ जी के 96वें जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित किया गया। समारोह में हिमाचल सहित दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के 11 विशिष्ट जनों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अलंकृत किया गया।
1958 से अनवरत जारी है कला और संस्कृति का संरक्षण
इस राष्ट्र स्तरीय समारोह की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल सुरेश कुमार मोगा ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आचार्य चन्द्रमणि वशिष्ठ ने वर्ष 1958 में जिस सांस्कृतिक व कला धरोहर के संरक्षण के लिए इस संस्था की नींव रखी थी, उसके महत्व को वर्ष 1976 में देश के संविधान ने भी समझा और इसे मौलिक अधिकारों व कर्तव्यों के तहत सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी।

संस्था के सफर पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि आचार्य वशिष्ठ जी का मानना था कि समाज में विशेष कार्य कर रहे हर व्यक्ति को ‘पद्मश्री’ या अन्य सरकारी पुरस्कार मिलना संभव नहीं है, लेकिन उन्हें स्थानीय स्तर पर सम्मानित करने से जहाँ उनका हौसला बढ़ता है, वहीं दूसरों को प्रेरणा मिलती है। इसी उद्देश्य के साथ खंड स्तर से शुरू हुआ यह सफर आज राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच चुका है और संस्था अब तक 900 से अधिक विभूतियों को सम्मानित कर चुकी है।
इन 11 विभूतियों को मिला महा-अलंकरण
समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में देश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे 11 विशिष्ट जनों को तीन बड़ी श्रेणियों के तहत राष्ट्रीय अलंकरणों से नवाजा गया। साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पांच विभूतियों को ‘डॉ. परमार पुरस्कार’ से नवाजा गया। इनमें साहित्य सेवा के लिए डॉ. ममता सोनी, प्रो. राजेश्वर प्रसाद मिश्र व रश्मि संजय श्रीवास्तव और समाजसेवा के लिए एस.एस. शर्मा व श्रीमती इंदिरा शर्मा को सम्मानित किया गया।
इसी तरह समाजसेवा और पत्रकारिता के क्षेत्र के लिए ‘महाराजा राजेन्द्र प्रकाश पुरस्कार’ प्रदान किया गया। इसके तहत समाजसेवा के लिए उचित सिंघल और पत्रकारिता के लिए सतीश शर्मा को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से अलंकृत किया गया।
लोक संस्कृति, साहित्य और युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए ‘आचार्य वशिष्ठ सम्मान’ से चार विभूतियों को विभूषित किया गया। जिसमें लोक संस्कृति के लिए कँवर खजानसिंह ‘हाटी’ व दलीप ‘ठुंडु’ की जोड़ी, लोक साहित्य के लिए यादव किशोर गौतम और ‘नई कलम’ के लिए हेमराज राणा को सम्मानित किया गया।
‘हारुल’ की प्रस्तुति ने बांधा समां
समारोह का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। इस अवसर पर सिरमौर की सुप्रसिद्ध लोक गायक ‘जीजा-साला’ (ठुंडु) जोड़ी ने अपनी पारंपरिक शैली में सिरमौर की रियासतकालीन ‘हारुल’ की ऐसी जीवंत प्रस्तुति दी कि पांडाल में मौजूद सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए और पूरा माहौल सिरमौरी संस्कृति के रंग में रंग गया।