सोलन: श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन बड़ी संख्या में भक्तों ने उपस्थित होकर प्रभु भक्ति का आनंद लिया। इस दौरान महाराज श्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रसंगों के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, उनकी कृपा और नाम-स्मरण के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने सभी भक्तों से नियमित सत्संग सुनने, सदाचार अपनाने और प्रभु का स्मरण करने का आह्वान किया। इन भावपूर्ण प्रसंगों को सुनकर भक्त भावविभोर हो गए और पूरा कथा स्थल भक्तिमय हो उठा।

कथा के बीच महाराज श्री ने सभी भक्तों को गिरिराज भगवान की मासिक परिक्रमा भी कराई। पूरी श्रद्धा और प्रेम के साथ श्रद्धालुओं ने गिरिराज महाराज का स्मरण किया। इस दौरान “राधे-राधे” के जयकारों और संकीर्तन से पूरा वातावरण गूंज उठा। महाराज श्री के सान्निध्य में भक्तों ने गिरिराज जी के प्रति अपनी आस्था जताते हुए सभी के कल्याण, सुख और शांति की कामना की।
इस अवसर पर महाराज श्री ने जीवन से जुड़ी कई अहम बातों पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गौ माता की सेवा करनी चाहिए। उन्हें भोजन-चारा खिलाना और उनकी रक्षा करना पुण्य का काम है। बच्चों को सिर्फ अच्छी शिक्षा ही काफी नहीं है, बच्चों को धर्म और संस्कारों से जोड़ना भी जरूरी है। बचपन से ही उन्हें रामायण, भागवत और गीता की शिक्षा दें।
उन्होंने कहा कि जब भी धरती पर अधर्म बढ़ता है, भगवान धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। धन समय के साथ घट-बढ़ सकता है, लेकिन अच्छे संस्कारों वाली संतान पूरे समाज और राष्ट्र का भविष्य संवारती है। दुख में हम भगवान को कोसते हैं और सुख में भूल जाते हैं। सच्ची भक्ति वही है जो हर परिस्थिति में प्रभु का स्मरण करे और धन्यवाद दे।