शिमला: आज के भागदौड़ भरे जीवन में युवा पीढ़ी को मानसिक तनाव, अवसाद और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने के उद्देश्य से शिमला विश्वविद्यालय (APG) के मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान का साप्ताहिक आयोजन शुक्रवार को श्रद्धापूर्वक शुरू हुआ। इस दिव्य आयोजन का शुभारंभ संस्कृत गुरुकुल पंचकूला के परम श्रद्धेय स्वामी श्री निवासाचार्य जी के पावन सानिध्य में हुआ।

अनुष्ठान के प्रथम दिन सुबह 11:00 बजे भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें सौभाग्यवती महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर भागवत स्थापना की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वामी जी का गर्मजोशी से स्वागत किया। व्यासपीठ से स्वामी निवासाचार्य ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं, छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए श्रीमद्भागवत की महिमा का बखान किया।
स्वामी निवासाचार्य ने अपने संबोधन में वर्तमान समय की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अध्यात्म कोई केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह युवाओं को आपाधापी के बीच शांत रहना सिखाता है। आध्यात्मिक ज्ञान व्यक्ति के आत्मबल को बढ़ाता है, जिससे वह नशे और नकारात्मक प्रवृत्तियों की ओर आकर्षित नहीं होता। उन्होंने कहा कि आज विदेशों में भारतीय संस्कृति अपनाई जा रही है, जबकि हमारा युवा पाश्चात्य संस्कृति की ओर भाग रहा है। हमें अपनी जड़ों से जुड़कर ही भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बनाना होगा।