सोलन: हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों के लिए एक राहत भरी खबर है। फसलों को बीमारियों से बचाने और सही समय पर उनका सटीक इलाज करने के लिए हमीरपुर के नेरी में एक खास क्लिनिक खुलने जा रहा है।
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने वर्चुअल माध्यम से इस अत्याधुनिक ‘पादप स्वास्थ्य निदान क्लिनिक’ की आधारशिला रखी। यह क्लिनिक नेरी स्थित औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय में बनाया जा रहा है।

किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
अक्सर किसानों को पता ही नहीं चलता कि उनकी फसल या पौधों में कौन सी बीमारी लगी है और वे अंदाजे से कीटनाशकों का छिड़काव करते रहते हैं। इस क्लिनिक के बनने से फसलों में लगने वाले रोगों की समय रहते और सटीक पहचान हो सकेगी।
कुलपति प्रो. बवेजा ने बताया कि बीमारी का सही समय पर पता चलने से किसान सिर्फ वही दवा डालेंगे जिसकी जरूरत है। इससे बिना वजह कीटनाशकों का इस्तेमाल रुकेगा, खेती की लागत कम होगी और पर्यावरण प्रदूषण भी घटेगा। इसके अलावा नए बगीचे लगाते समय पौधों में पहले से मौजूद बीमारियों को पहचान कर उन्हें फैलने से रोका जा सकेगा।
बदलते मौसम की बीमारियों पर भी रहेगी नजर
आजकल मौसम में हो रहे बदलावों की वजह से तापमान और बारिश का चक्र बिगड़ गया है। इसका सीधा असर फसलों पर पड़ रहा है और नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। यह क्लिनिक इन नए खतरों की निगरानी करेगा और मौसम के हिसाब से किसानों को बचाव की सलाह देगा।
युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते
नेरी कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. एस.के. भारद्वाज ने बताया कि यह सुविधा सिर्फ बीमारियों की जांच तक सीमित नहीं रहेगी। यहां छात्रों और युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक के जरिए पौधों की बीमारियों की जांच का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे बागवानी की पढ़ाई करने वाले युवा खुद के मोबाइल क्लिनिक, कृषि तकनीक स्टार्टअप और कंसल्टेंसी जैसी सेवाएं शुरू कर सकेंगे।
इस मौके पर डॉ. पी.के. बवेजा, डॉ. शशि शर्मा, डॉ. मोनिका शर्मा, डॉ. अमित शर्मा, डॉ. विकास शर्मा, डॉ. बंदना धीमान, डॉ. प्रीति चौधरी और डॉ. दीपक अग्निहोत्री समेत कई वैज्ञानिक और कर्मचारी मौजूद रहे।