सोलन: सिरमौर कल्याण मंच, सोलन द्वारा आयोजित डॉ. यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती समारोह में इस वर्ष डॉ. वाई.एस. परमार सम्मान-2026 वरिष्ठ शिक्षाविद्, संस्कृत मनीषी, साहित्यकार एवं समाजसेवी देवेंद्र सिंह तोमर शास्त्री को प्रदान किया गया। इसी प्रकार हाटी सांस्कृतिक कला मंच कफोटा (शिलाई) को सिरमौर सम्मान-2026 से नवाजा गया। कार्यक्रम के मुख्यातिथि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ कर्नल धनीराम शांडिल के हाथों यह पुरस्कार मिला।

ये हैं देवेंद्र शास्त्री का परिचय….
देवेंद्र सिंह तोमर शास्त्री का जन्म 4 जून 1946 को जिला सिरमौर की की पच्छाद तहसील के मल्होटी गांव में हुआ। उनके पिता का नाम फूला सिंह तथा माता का नाम बसंती देवी था। प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने यमुनानगर और संस्कृत कॉलेज सोलन से उच्च शिक्षा हासिल की।
उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा, संस्कार और समाज सेवा को समर्पित किया। एक आदर्श शिक्षक के रूप में उन्होंने वर्षों तक विद्यार्थियों को संस्कृत और हिंदी की शिक्षा प्रदान की तथा उनमें अनुशासन, चरित्र, नैतिकता और भारतीय जीवन मूल्यों का संस्कार विकसित किया। भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है।
सिरमौर सहित हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उन्होंने अपने व्याख्यानों और साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति उनका समर्पण अनेक संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी से भी स्पष्ट होता है।
जनसेवा के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शास्त्री जी साहित्य साधना में भी समान रूप से सक्रिय रहे हैं। ‘सनातन धर्म ग्रंथों में शासन का स्वरूप’ विषय पर उनका शोधग्रंथ प्रकाशित हो चुका है। इसके अतिरिक्त उन्होंने हिंदी और सिरमौरी भाषा में एक सौ से अधिक कविताएं और गीतों की रचना की है, जो उनकी लोकसंवेदना और समाज सुधार की भावना को अभिव्यक्त करते हैं।
वे एक कुशल वक्ता, लोकजीवन एवं लोकसंस्कृति के गहरे अध्येता तथा योग और वैदिक चिंतन के समर्थक भी हैं। शास्त्रीय संगीत में उनकी रुचि उल्लेखनीय है और वे हारमोनियम तथा तबला वादन में भी दक्ष माने जाते हैं।
हाटी सांस्कृतिक कला मंच कर रहा है सिरमौर की समृद्ध सांस्कृति का संरक्षण
सिरमौर जिला के हाटी क्षेत्र की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए हाटी सांस्कृतिक कला मंच, कफोटा-शिलाई (जिला सिरमौर) को ‘सिरमौर सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। समारोह में मंच के प्रतिनिधियों भाव सिंह कपूर व उनके साथी कलाकारों ने सम्मान ग्रहण किया। हाटी क्षेत्र की पारंपरिक लोक-संस्कृति, लोकगीत, लोकनृत्य और विवाह संस्कारों से जुड़ी कई प्राचीन परंपराएं आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही थीं। ऐसे समय में हाटी सांस्कृतिक कला मंच ने इन लोक परंपराओं को पुनर्जीवित करने का सराहनीय कार्य किया है।
मंच की स्थापना वर्ष 1999 में लोक-संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी। संस्था ने गिरिपार क्षेत्र की पारंपरिक विधाओं रासा, झिरी, झूरी, भाभी, गंगी, लामण, हारुल, बूढ़ी दिवाली के लोकगीत तथा विवाह संस्कारों के गीतों को पुन: जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच से जुड़े कलाकारों में आत्माराम शर्मा, जगदीश शर्मा, दयाराम शर्मा, देवेंद्र शर्मा, रमेश सोलंकी सहित अनेक लोक कलाकारों का योगदान उल्लेखनीय है।
मंच द्वारा वर्ष 1999 में ‘हाटी की गूंज’ नामक पहला पहाड़ी ऑडियो कैसेट तैयार किया था। इस कैसेट को हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड में भी व्यापक लोकप्रियता मिली और इसके गीत लोकसंस्कृति के पुनर्जागरण का माध्यम बने। युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩे का भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। संस्था आज भी लोकसंस्कृति के संरक्षण, नवोदित कलाकारों के प्रोत्साहन तथा हाटी समाज की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन हेतु सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।