बड़ू साहिब: इटरनल यूनिवर्सिटी, बड़ू साहिब का 14वां दीक्षांत समारोह शनिवार को यहाँ के वैली ऑफ डिवाइन पीस में संपन्न हुआ। यह ऐतिहासिक समारोह संस्थान के संस्थापक संत बाबा इकबाल सिंह जी की 100 वर्षों की सेवा एवं कार्य की विरासत (1926–2026) को समर्पित रहा। इस भव्य आयोजन में डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन के कुलपति डॉ. हरमिंदर सिंह बावेजा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
समारोह की शुरुआत पारंपरिक पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों और पावन शब्द कीर्तन के साथ हुई। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं द कलगीधर ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. दविंदर सिंह और कुलपति डॉ. नीलम कौर ने मुख्य अतिथि का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, प्राध्यापक, बड़ी संख्या में विद्यार्थी, उनके अभिभावक और बड़ू साहिब शैक्षणिक परिसर से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

दीक्षांत समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों की शिक्षा सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले कुल 293 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गई। इस दीक्षांत समारोह में 2500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, अकादमिक और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विशेष पुरस्कारों से नवाजा गया, जिसमें उत्कृष्टता पुरस्कार (6), डॉ. जसजीत बलवंत अटवाल एम.डी. छात्रवृत्ति (5), सर्वश्रेष्ठ पुस्तकालय उपयोगकर्ता पुरस्कार (2) और कुल 11 पदक पुरस्कार प्रदान किए गए।
स्नातक स्तर पर कृषि विज्ञान (ऑनर्स) की छात्रा गरिमा चौहान को उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय पदक से सम्मानित किया गया। स्नातकोत्तर स्तर पर कृषि शस्य विज्ञान की छात्रारवनीत कौर को भी उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय पदक प्रदान किया गया।
इटरनल यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. नीलम कौर ने विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए संस्थान की शैक्षणिक विकास यात्रा, उपलब्धियों और अनुसंधान कार्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्हें शिक्षा के साथ-साथ जिम्मेदारी, अनुशासन और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।
कुलाधिपति डॉ. दविंदर सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और ज्ञान का लाभ केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका सकारात्मक प्रभाव समाज तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी योग्यता के बल पर रोजगार के नए अवसर सृजित करें और कम से कम एक जरूरतमंद व्यक्ति का हाथ पकड़कर उसके जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि एक दीपक से दूसरा दीपक जलता है, और इसी प्रकार ज्ञान व सेवा की ज्योति आगे बढ़ती है।
मुख्य अतिथि डॉ. हरमिंदर सिंह बावेजा ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए शिक्षा, शोध और संस्थागत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी और इटरनल यूनिवर्सिटी के बीच जल्द ही एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके माध्यम से दोनों संस्थान अकादमिक और शोध के क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे, जिससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए नए और बेहतरीन अवसर विकसित होंगे।
समारोह का एक मुख्य आकर्षण इस ग्रंथ का विमोचन रहा, जिसमें बड़ू साहिब और इटरनल यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त कर चुके पूर्व छात्रों की सफल यात्राओं और उपलब्धियों को संकलित किया गया है। समारोह में गुरु नानक देव जी के पवित्र संदेश “विद्या वीचारी तां परउपकारी” को मुख्य रूप से रेखांकित किया गया, जिसके तहत ज्ञान के वास्तविक उपयोग को दूसरों के कल्याण से जोड़ा गया।
यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की शैक्षणिक सफलता का उत्सव मनाने के साथ-साथ उन्हें बड़ू साहिब की सेवा, परोपकार और उच्च संस्कारों की परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देकर संपन्न हुआ।