डॉ. यशवंत सिंह परमार की जयंती पर नौणी विश्वविद्यालय में दी गई श्रद्धांजलि

Photo of author

By Hills Post

सोलन: आधुनिक हिमाचल प्रदेश के निर्माता एवं प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की जयंती के अवसर पर डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने सांविधिक अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के साथ डॉ. परमार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की। इस अवसर पर कुलपति ने परिसर में एक पौधा रोपित कर विश्वविद्यालय के माहभर चलने वाले ‘पौधारोपण अभियान’ का भी शुभारंभ किया। इस अभियान के तहत परिसर में हरित आवरण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के लैंडस्केप और सजावटी वृक्ष लगाए जाएंगे।

उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने हिमाचल में कृषि, बागवानी और वानिकी के विकास में डॉ. परमार के दूरदर्शी योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार ने समय से बहुत पहले यह भांप लिया था कि पर्वतीय अर्थव्यवस्था का विकास केवल पारंपरिक कृषि पर निर्भर रहकर नहीं हो सकता। उन्होंने बागवानी, वानिकी और पारंपरिक पहाड़ी फसलों को बढ़ावा देकर प्रदेश में सतत एवं समावेशी विकास की मजबूत नींव रखी। डॉ. परमार की जयंती पर इस अभियान का शुभारंभ उनकी अमूल्य विरासत को सच्ची श्रद्धांजलि है।

प्रो. बवेजा ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे डॉ. परमार के सपनों को साकार करने के लिए समर्पित भाव से कार्य करें और सुनिश्चित करें कि विकास हमेशा प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर हो।

कुलपति ने बताया कि यह पौधारोपण अभियान पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और परिसर के सतत विकास के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। जयंती समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने संगीत, नृत्य एवं विभिन्न आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से डॉ. परमार को अपनी संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की।

Photo of author

Hills Post

हम उन लोगों और विषयों के बारे में लिखने और आवाज़ बुलंद करने का प्रयास करते हैं जिन्हे मुख्यधारा के मीडिया में कम प्राथमिकता मिलती है ।